Politics : हरीश राव ने जल अधिकारों की रक्षा के लिए नए आंदोलन का किया आह्वान

By digital | Updated: July 27, 2025 • 8:44 PM

केंद्र के साथ मिलीभगत का आरोप

हैदराबाद। पूर्व मंत्री और भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेता टी हरीश राव ने राज्य के जल अधिकारों की रक्षा के लिए नए सिरे से तेलंगाना आंदोलन का आह्वान किया है। उन्होंने विवादास्पद बनकाचरला परियोजना को लेकर कांग्रेस, भाजपा और टीडीपी की मिलीभगत का आरोप लगाया है। यहां छात्रों की एक सभा को संबोधित करते हुए राव ने मुख्यमंत्री (CM) ए रेवंत रेड्डी और आंध्र प्रदेश के उनके समकक्ष एन चंद्रबाबू नायडू पर तेलंगाना के हितों से समझौता करने के लिए केंद्र के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया

तेलंगाना के लोग बनकाचारला परियोजना को कभी स्वीकार नहीं करेंगे

हरीश राव ने कहा, ‘रेवंत का मानना है कि दिल्ली पर उनका नियंत्रण है, और चंद्रबाबू मानते हैं कि वे अपनी शर्तें मनवा सकते हैं, लेकिन उनके समझौते के बावजूद, तेलंगाना के लोग बनकाचारला परियोजना को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। राव ने कहा कि बीआरएस इस परियोजना को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी और चेतावनी दी कि पार्टी तेलंगाना राज्य संघर्ष जैसा एक जन आंदोलन शुरू करने से भी नहीं हिचकिचाएगी।

दिल्ली को पुनर्विचार के लिए मजबूर करेंगे

उन्होंने विशेष रूप से उस्मानिया और काकतीय विश्वविद्यालयों की भूमिका का ज़िक्र करते हुए कहा कि वे एक बार फिर विरोध का केंद्र बनेंगे। राव ने गरजते हुए कहा, ‘हम राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध करेंगे, रेल रोको आंदोलन करेंगे और दिल्ली को पुनर्विचार के लिए मजबूर करेंगे। तेलंगाना के पानी की एक भी बूँद नहीं छोड़ी जाएगी।’ उन्होंने नागरिकों से राज्य के वाजिब हिस्से को कमज़ोर करने की इस सुनियोजित कोशिश का विरोध करने का आग्रह किया।

केसीआर और हरीश राव के बीच क्या संबंध है?

तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और वित्त मंत्री टी. हरीश राव के बीच पारिवारिक संबंध है। हरीश राव केसीआर के भतीजे हैं और तेलंगाना आंदोलन से लेकर राज्य सरकार में कई प्रमुख विभागों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। दोनों नेता टीआरएस से जुड़े हैं।

हरीश रावत कितनी बार मुख्यमंत्री बने थे?

उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत दो बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। पहली बार उन्होंने 2014 में विजय बहुगुणा के इस्तीफे के बाद पद संभाला, और दूसरी बार 2016 में कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन हटने के बाद पुनः मुख्यमंत्री पद पर रहे। दोनों कार्यकाल राजनीतिक अस्थिरता से घिरे रहे।

हरीश रावत की योग्यता क्या है?

राजनीतिक दृष्टि से हरीश रावत एक अनुभवी और वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की है। वे लंबे समय तक सांसद, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री रह चुके हैं। जनसंघर्षों, संगठन क्षमता और संसदीय अनुभव में उनकी विशेष योग्यता मानी जाती है।

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