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America: अमेरिकी इकॉनमी का बदलता चेहरा

Author Icon By Dhanarekha
Updated: February 20, 2026 • 4:46 PM
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बुजुर्गों के हाथ में बाजार की कमान

वाशिंगटन: अमेरिका(America) में पीढ़ीगत संपत्ति का अंतर (Wealth Gap) अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। फेड रिजर्व के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल संपत्ति का 73.7% हिस्सा अब 55 साल से अधिक उम्र के लोगों के पास है। साल 2000 में यह आंकड़ा 56.2% था। इसका मतलब है कि पिछले 25 वर्षों में बुजुर्गों की आर्थिक ताकत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जबकि युवा पीढ़ी के पास संसाधनों की कमी होती जा रही है

कंज्यूमर स्पेंडिंग: खर्च के मामले में बेबी बूमर्स सबसे आगे

सिर्फ संपत्ति ही नहीं, बल्कि खर्च करने के मामले में भी उम्रदराज लोग युवाओं(America) को पीछे छोड़ रहे हैं। कुल कंज्यूमर स्पेंडिंग में 55+ उम्र के लोगों की हिस्सेदारी बढ़कर 45.3% हो गई है, जो पिछले 28 सालों में सबसे अधिक है। बैंक ऑफ अमेरिका के आंकड़े बताते हैं कि ‘बेबी बूमर’ जेनरेशन (1946-1964 के बीच जन्मे) क्रेडिट और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने में जेन जी (Gen Z) और मिलेनियल्स से कहीं आगे हैं।

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युवा पीढ़ी की चुनौतियां: कर्ज और महंगाई का बोझ

जहाँ बुजुर्गों के पास संचित पूंजी है, वहीं अमेरिका(America) की युवा पीढ़ी (मिलेनियल्स और जेन जी) भारी आर्थिक दबाव में है। 54 साल से कम उम्र के लोगों की खर्च करने की क्षमता साल 2000 के 72% से गिरकर अब 54.7% रह गई है। इसका मुख्य कारण हाउसिंग मार्केट की बढ़ती कीमतें, महंगे रेंट और स्टूडेंट लोन का भारी बोझ है। युवा अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बुनियादी जरूरतों और कर्ज चुकाने में खर्च कर रहे हैं, जिससे बाजार में उनकी विवेकाधीन खर्च करने की शक्ति कम हो गई है।

‘बेबी बूमर’ और ‘जेन जी’ जेनरेशन में मुख्य अंतर क्या है?

‘बेबी बूमर’ उन लोगों को कहा जाता है जिनका जन्म 1946 से 1964 के बीच हुआ था, ये वर्तमान में सबसे अमीर पीढ़ी है। वहीं ‘जेन जी’ (Gen Z) 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग हैं, जो अभी करियर की शुरुआत कर रहे हैं और महंगाई व लोन की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

बुजुर्गों के पास इतनी ज्यादा संपत्ति होने का इकॉनमी पर क्या असर पड़ेगा?

इसका मतलब है कि बाजार अब बुजुर्गों की जरूरतों (जैसे हेल्थकेयर, लग्जरी ट्रैवल और रिटायरमेंट सेवाओं) के इर्द-गिर्द ज्यादा घूमेगा। हालांकि, अगर युवाओं की खर्च करने की क्षमता लगातार गिरती रही, तो भविष्य में रियल एस्टेट और नई तकनीकों की मांग में कमी आ सकती है, जो लंबी अवधि में विकास के लिए चिंता का विषय है।

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