Anil Ambani: अनिल अंबानी पर संकट: ₹1.5 लाख करोड़ के घोटाले का आरोप

By Dhanarekha | Updated: January 23, 2026 • 7:59 PM

सुप्रीम कोर्ट ने CBI-ED से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली: रिलायंस ADAG समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी(Anil Ambani) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अनिल अंबानी को नए नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने देश की प्रमुख जांच एजेंसियों, CBI और ED, को सख्त निर्देश देते हुए 10 दिनों के भीतर इस मामले में चल रही जांच की ‘स्टेटस रिपोर्ट’ सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा है

देश का सबसे बड़ा ‘कॉर्पोरेट फ्रॉड’ होने का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा बैंकिंग और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घोटाला साल 2007-08 से ही सुनियोजित तरीके(Anil Ambani) से चल रहा था, लेकिन इसके खिलाफ FIR दर्ज करने में बहुत देरी हुई। याचिका में दावा किया गया है कि सार्वजनिक बैंकों के धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया और इसे समूह की ही दूसरी कंपनियों में डायवर्ट (मोड़ना) कर दिया गया। कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने का जिम्मा सौंपा है कि नोटिस अनिल अंबानी तक पहुंचे।

ED की कार्रवाई: ₹10,117 करोड़ की संपत्ति जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में पहले से ही सक्रिय है और अब तक अंबानी समूह की लगभग ₹10,117 करोड़ की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। इसमें मुंबई स्थित रिलायंस सेंटर, फिक्स्ड डिपॉजिट और कई अनलिस्टेड निवेश शामिल हैं। जांच में पाया गया है कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस के जरिए यस बैंक से मिले फंड का गलत इस्तेमाल हुआ। लोन की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं मिली हैं, जहां बिना किसी उचित जांच(Anil Ambani) और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर उसी दिन लोन मंजूर और डिस्बर्स (जारी) कर दिए गए।

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यस बैंक को लगा ₹2,700 करोड़ का फटका

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने अनिल अंबानी(Anil Ambani) की दो प्रमुख वित्तीय कंपनियों में करीब ₹5,000 करोड़ का निवेश किया था। दिसंबर 2019 तक यह निवेश डूब गया और नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) में बदल गया, जिससे यस बैंक को सीधे तौर पर ₹2,700 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। ED ने इसे ‘जानबूझकर किया गया कंट्रोल फेल्योर’ बताया है। अब सुप्रीम कोर्ट यह देख रहा है कि क्या इस फ्रॉड में बैंक के बड़े अधिकारी भी शामिल थे जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर लोन बांटे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में CBI और ED को क्या विशेष निर्देश दिए हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों जांच एजेंसियों को अगले 10 दिनों के भीतर इस मामले की जांच में हुई प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट ‘सीलबंद लिफाफे’ में पेश करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने अंबानी समूह को यह आखिरी चेतावनी(Anil Ambani) भी दी है कि वे जारी किए गए नोटिसों का जवाब दें।

ईडी की जांच में ‘फंड डायवर्जन’ को लेकर क्या अहम खुलासे हुए हैं?

जांच में पता चला है कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस ने यस बैंक से लिए गए ऋण का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जिनके लिए वे लिए गए थे। इसके बजाय, यह पैसा समूह की अन्य कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। साथ ही, कई लोन बिना किसी क्रेडिट रेटिंग या फील्ड चेक के ही बांट दिए गए थे।

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