₹40,000 करोड़ के कर्ज और ‘अबोड’ की कुर्की का पूरा सच
मुंबई: रिलायंस ग्रुप के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी(Anil Ambani) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। 26 फरवरी को वे दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष पेश हुए, जहां उनसे रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गहन पूछताछ की गई। जांच एजेंसी का मुख्य फोकस बैंकों से लिए गए ₹40,185 करोड़ के कर्ज के कथित डायवर्जन और विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन पर है। यह पूछताछ 2019 में दर्ज की गई CBI की FIR के आधार पर की जा रही है, जिसमें फंड्स को हेरफेर कर विदेशी खातों या अन्य कंपनियों में भेजने का संदेह है।
आलीशान बंगला ‘अबोड’ हुआ कुर्क
जांच के दायरे में अनिल अंबानी का मुंबई स्थित आलीशान घर ‘अबोड’ भी आ गया है। ED ने पाली हिल स्थित इस 17 मंजिला इमारत को प्रोविजनल(Anil Ambani) तौर पर कुर्क कर लिया है, जिसकी कीमत लगभग ₹3,716 करोड़ आंकी गई है। इस बंगले में हेलीपैड, स्विमिंग पूल और जिम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। ‘प्रोविजनल अटैचमेंट’ का अर्थ है कि अब इस संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही किसी को ट्रांसफर किया जा सकता है। इससे पहले भी इस प्रॉपर्टी के एक हिस्से पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब पूरी इमारत जांच के घेरे में है।
अन्य पढ़े: विदेशी नागरिकों के आधार कार्ड पर सख्ती
SIT की सक्रियता और भविष्य की चुनौतियां
अनिल अंबानी की परेशानियों में इजाफे का एक बड़ा कारण सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम(Anil Ambani) है। यह टीम रिलायंस धीरूभाई अंबानी ग्रुप के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और बैंक धोखाधड़ी के मामलों की तेजी से जांच कर रही है। अब तक इस पूरे मामले में करीब ₹15,700 करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। यदि पूछताछ के दौरान बयानों में विसंगतियां पाई जाती हैं या मनी लॉन्ड्रिंग के ठोस सबूत मिलते हैं, तो आने वाले समय में नई चार्जशीट और संभावित गिरफ्तारी जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
क्या इस मामले का असर मुकेश अंबानी या उनके बिजनेस पर पड़ेगा?
जी नहीं। अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी का बिजनेस साम्राज्य लगभग 20 साल पहले पूरी तरह अलग हो चुका है। यह मामला विशेष रूप से अनिल अंबानी की कंपनियों और उनके प्रबंधन से जुड़ा है। इसमें मुकेश अंबानी या रिलायंस इंडस्ट्रीज की कोई संलिप्तता नहीं है।
‘अबोड’ बंगले की कुर्की का अनिल अंबानी के रहने पर क्या असर होगा?
‘प्रोविजनल अटैचमेंट’ के तहत संपत्ति को फ्रीज किया जाता है ताकि उसे बेचा न जा सके। फिलहाल, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक वे वहां रह सकते हैं, लेकिन संपत्ति पर मालिकाना हक का कानूनी अधिकार सीमित हो जाता है। यदि कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप साबित हो जाते हैं, तब सरकार इस संपत्ति को पूरी तरह अपने कब्जे में ले सकती है।
अन्य पढ़े: