Crude Oil: कच्चे तेल में ऐतिहासिक उबाल

By Dhanarekha | Updated: March 9, 2026 • 2:48 PM

युद्ध के साये में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना और भारत पर प्रभाव

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल(Crude Oil) की कीमतें साढ़े तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड में 25% का उछाल इसे 116 डॉलर प्रति बैरल तक ले आया है। इस संकट(Crisis) का मुख्य केंद्र ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) है, जो दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20% संभालता है। सुरक्षा कारणों से इस प्रमुख मार्ग के बंद होने और कतर, सऊदी अरब तथा कुवैत की ऑयल रिफाइनरियों पर हुए ड्रोन हमलों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है

भारत के लिए चुनौती और सामरिक

भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी संकटग्रस्त रास्ते से आयात करता है। हालांकि जानकारों का मानना है कि पेट्रोल(Crude Oil) और डीजल की कीमतों में 5 से 6 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन सरकार ने आश्वस्त किया है कि भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है। रिपोर्ट के अनुसार, हमारे सामरिक रिजर्व इतने मजबूत हैं कि आपूर्ति पूरी तरह बाधित होने पर भी देश की सप्लाई चेन 7 से 8 हफ्तों तक निर्बाध रूप से चल सकती है, जिससे निकट भविष्य में ईंधन की भारी किल्लत की संभावना कम है।

अन्य पढ़े: ईरान-इजराइल युद्ध की आग

नीतिगत बदलाव और घरेलू रसोई पर असर

अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा रूसी तेल खरीद के लिए भारत(Crude Oil) को 30 दिनों का विशेष लाइसेंस देना एक राहत भरी खबर है, जो आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद करेगी। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता के बीच घरेलू स्तर पर महंगाई की मार भी दिखी है। सरकार ने दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर के दाम 60 रुपये (913 रुपये) और कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 115 रुपये (1883 रुपये) बढ़ा दिए हैं, जो 7 मार्च से प्रभावी हो चुके हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में इतनी तीव्र गति से बढ़ोतरी क्यों हो रही है?

मुख्य कारण ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का सुरक्षित न रह पाना है। साथ ही, सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों की ऑयल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमलों से उत्पादन में कटौती हुई है, जिससे वैश्विक आपूर्ति बाधित हो गई है।

क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की भारी कमी होने की आशंका है?

नहीं, फिलहाल चिंता की बात नहीं है। सरकार के पास मौजूद तेल भंडार (Strategic Reserves) इतने पर्याप्त हैं कि अगर आयात पूरी तरह रुक भी जाए, तो भी भारत की सप्लाई चेन 7 से 8 हफ्तों तक बिना किसी समस्या के चल सकती है।

अन्य पढ़े:

#Breaking News in Hindi #CrudeOil #EnergyCrisis #GlobalInflation #Google News in Hindi #Hindi News Paper #IndiaEconomy #IranIsraelConflict #StraitOfHormuz