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Digital Blackout: डिजिटल ब्लैकआउट का खतरा

Author Icon By Dhanarekha
Updated: April 1, 2026 • 4:26 PM
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युद्ध की चपेट में समुद्र के नीचे बिछीं इंटरनेट केबल्स, भारत पर बड़ा असर

नई दिल्ली: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव(Digital Blackout) ने न केवल तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, बल्कि अब वैश्विक इंटरनेट के ठप होने का डर भी पैदा कर दिया है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के समुद्री रास्ते के नीचे से दुनिया की महत्वपूर्ण फाइबर ऑप्टिक केबल्स गुजरती हैं। अक्सर हमें लगता है कि इंटरनेट सैटेलाइट से चलता है, लेकिन हकीकत में दुनिया का 97% डेटा इन्हीं समुद्री केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध के दौरान इन केबल्स(Cables) को नुकसान पहुंचता है, तो यह इलाका सिर्फ ‘एनर्जी चोकपॉइंट’ नहीं, बल्कि एक ‘डिजिटल चोकपॉइंट’ साबित होगा

भारतीय आईटी सेक्टर और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर संकट

भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि भारत का अधिकांश अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र के इन्हीं रूटों (जैसे SEA-ME-WE और AAE-1) से होकर आता है। यदि ये केबल्स प्रभावित होती हैं, तो डेटा को लंबे ‘पैसिफिक रूट’ पर डायवर्ट करना पड़ेगा, जिससे ‘लेटेंसी’ (डेटा ट्रैवल टाइम) बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर भारत के ₹23.48 लाख करोड़ के आईटी और आउटसोर्सिंग सेक्टर(Digital Blackout) पर पड़ेगा। वीडियो कॉलिंग, क्लाउड सर्विसेज और रियल-टाइम बैंकिंग ट्रांजेक्शन (SWIFT) धीमे हो सकते हैं, जिससे विदेशी क्लाइंट्स के साथ काम करना मुश्किल हो जाएगा।

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री-रूटिंग और वैकल्पिक समाधान की चुनौती

इंटरनेट का ढांचा इस तरह बना है कि एक रास्ता बंद होने पर ट्रैफिक दूसरे रास्ते पर चला जाता है, इसलिए ‘टोटल ब्लैकआउट’ की संभावना तो कम है, लेकिन इंटरनेट की स्पीड बहुत धीमी हो जाएगी। शेयर बाजार और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग जैसे क्षेत्रों में, जहाँ एक मिलीसेकंड की भी कीमत होती है, वहां बड़ा वित्तीय जोखिम खड़ा हो सकता है। इस खतरे को देखते हुए भारत अब स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट इंटरनेट और वैकल्पिक समुद्री रास्तों पर निवेश बढ़ा रहा है ताकि संवेदनशील क्षेत्रों को बायपास किया जा सके। फिलहाल, होर्मुज का तनाव डिजिटल दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

समुद्र के नीचे बिछी केबल्स इंटरनेट के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

दुनिया का लगभग 95 से 97% इंटरनेट डेटा फाइबर ऑप्टिक केबल्स के माध्यम से ट्रांसफर होता है, न कि सैटेलाइट से। ये केबल्स महाद्वीपों को आपस में जोड़ती हैं और हाई-स्पीड इंटरनेट सुनिश्चित करती हैं। इनके कटने या खराब होने से अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बाधित हो जाती है।

केबल कटने की स्थिति में इंटरनेट की स्पीड पर क्या असर पड़ता है?

यदि मुख्य रूट की केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक और लंबे रास्तों से भेजना पड़ता है। इससे ‘लेटेंसी’ बढ़ जाती है, जिसका मतलब है कि डेटा को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में अधिक समय लगता है, जिससे इंटरनेट धीमा हो जाता है और बफरिंग बढ़ जाती है।

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