Energy: एनर्जी सिक्योरिटी पर संकट: क्या भारत के पास बचा है सिर्फ 25 दिन का तेल?

By Dhanarekha | Updated: March 4, 2026 • 2:43 PM

होर्मुज जलडमरूमध्य और सप्लाई चेन का संकट

नई दिल्ली: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, स्ट्रैट ऑफ होर्मुज(Energy), के बंद होने की खबर ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी सूत्रों(Government Sources) के हवाले से दावा किया जा रहा है कि देश के पास अब केवल 25 दिनों का कच्चा तेल और रिफाइंड स्टॉक बचा है। हालांकि, फरवरी में सरकार ने राज्यसभा में 74 दिनों के रिजर्व का दावा किया था, जिस पर अब विपक्ष (कांग्रेस) ने सवाल उठाए हैं। इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा

वैकल्पिक मार्ग और रूस से बढ़ती नजदीकी

भारत अपनी कच्चे तेल(Energy) की जरूरतों का 85% आयात करता है। मिडिल ईस्ट में तनाव को देखते हुए सरकार अब रूस और अफ्रीकी देशों(African Countries) जैसे वैकल्पिक सप्लायर्स पर फोकस कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत समुद्र में खड़े लगभग 95 लाख बैरल रूसी तेल टैंकरों को खरीदने की तैयारी में है। रूस से तेल खरीदना भारत के लिए न केवल सुरक्षित है, बल्कि डिस्काउंट के कारण यह आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है। पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार समीक्षा बैठकें कर रहा है ताकि देश में ईंधन की कमी न हो।

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आम जनता और उद्योगों पर प्रभाव

राहत की बात यह है कि सरकार का फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, कतर द्वारा नेचुरल गैस(Energy) की सप्लाई में 10% से 40% की कटौती करने से भारतीय उद्योगों पर बुरा असर पड़ा है। इसके अलावा, युद्ध के कारण जहाजों के लंबे रूट और बढ़ते इंश्योरेंस खर्च ने माल ढुलाई (Logistics) को महंगा कर दिया है। वाणिज्य मंत्रालय निर्यातकों और आयातकों के लिए पेमेंट प्रोसेस को आसान बनाने और कार्गो मूवमेंट में देरी कम करने पर काम कर रहा है।

स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है। भारत का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। यदि ईरान इस रूट को बंद करता है, तो भारत की तेल सप्लाई रुक जाएगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे देश में महंगाई बढ़ सकती है।

‘फोर्स मेजर’ (Force Majeure) क्या है और कतर ने इसे क्यों लागू किया?

‘फोर्स मेजर’ एक कानूनी क्लॉज है जिसे तब लागू किया जाता है जब कोई पक्ष (जैसे कतर) युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण अनुबंध (Contract) की शर्तों को पूरा करने में असमर्थ होता है। ईरान के हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से कतर ने भारत को होने वाली गैस सप्लाई में कटौती के लिए इसे लागू किया है।

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