‘कहीं भी, कभी भी’ सेवा: क्षेत्रीय सीमाओं का अंत
नई दिल्ली: केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के अनुसार, ईपीएफओ(EPFO) अब ‘सिंगल-विंडो सर्विस सेंटर’ में तब्दील होने जा रहा है। इसका सबसे क्रांतिकारी बदलाव यह है कि अब पीएफ खाताधारकों(Account Holders) को अपनी शिकायतों या दावों के लिए उस विशेष ऑफिस के चक्कर नहीं काटने होंगे जहाँ उनका खाता खुला था। दिल्ली में शुरू हुए पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, अब कोई भी कर्मचारी देश के किसी भी शहर के ईपीएफओ दफ्तर में जाकर अपनी समस्या सुलझा सकेगा। यह व्यवस्था ठीक वैसी ही होगी जैसे पासपोर्ट बनवाने के लिए आप किसी भी केंद्र का चयन कर सकते हैं।
सुविधा प्रोवाइडर और मिशन मोड केवाईसी
डिजिटल साक्षरता की कमी को दूर करने के लिए सरकार ‘ईपीएफ(EPFO) सुविधा प्रोवाइडर’ तैनात करेगी, जो तकनीकी रूप से अक्षम कर्मचारियों को क्लेम सेटलमेंट में मदद करेंगे। इसके साथ ही, सालों से बंद पड़े (Inoperative) खातों में फंसे लाखों करोड़ों रुपयों को उनके असली हकदारों तक पहुँचाने के लिए ‘मिशन मोड केवाईसी’ अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च होगा, जो पुराने और निष्क्रिय खातों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाएगा।
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वैश्विक कवरेज और 2026 का बड़ा लक्ष्य
भारत अब अपने मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) में सोशल सिक्योरिटी क्लॉज जोड़ रहा है, जिससे विदेश में काम करने वाले भारतीयों का पीएफ फंड सुरक्षित रहेगा। वर्तमान में ईपीएफओ 28 लाख करोड़ रुपए के विशाल फंड का प्रबंधन कर रहा है और 8.25% का आकर्षक ब्याज दे रहा है। सरकार का लक्ष्य(EPFO) मार्च 2026 तक देश के 100 करोड़ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने वाले सबसे बड़े देशों की श्रेणी में खड़ा कर देगा।
‘सिंगल-विंडो सर्विस’ से आम कर्मचारी को सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कर्मचारी को अपने पुराने दफ्तर या उस शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी जहाँ उसकी कंपनी रजिस्टर्ड थी। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का पीएफ खाता चेन्नई के ऑफिस में है और वह वर्तमान में दिल्ली में रह रहा है, तो वह दिल्ली के किसी भी नजदीकी ईपीएफओ सेंटर जाकर अपना काम करवा सकेगा।
क्या विदेश में नौकरी करने वालों का पीएफ पैसा अब सुरक्षित रहेगा?
हाँ, सरकार अब अन्य देशों के साथ होने वाले समझौतों में ‘सोशल सिक्योरिटी क्लॉज’ शामिल कर रही है। इससे यह सुनिश्चित(EPFO) होगा कि यदि कोई भारतीय कर्मचारी विदेश में काम करके वापस लौटता है, तो उसका वहां जमा पीएफ कंट्रीब्यूशन बेकार नहीं जाएगा और वह भारत में भी उन लाभों को प्राप्त कर सकेगा।
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