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Fuel: पेट्रोल-डीजल फिर हो सकता महंगा

Author Icon By Dhanarekha
Updated: May 24, 2026 • 7:10 PM
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ऊर्जा संकट से बढ़ी चिंता

नई दिल्‍ली: भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। भारत पेट्रोलियम(BPCL) के वरिष्ठ अधिकारी राज कुमार दुबे ने कहा है कि यदि वैश्विक ऊर्जा संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो ईंधन की कीमतें बढ़ाना मुश्किल नहीं बल्कि जरूरी हो सकता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियों के सामने कई विकल्प(Fuel) मौजूद हैं ताकि सप्लाई और बाजार संतुलन बनाए रखा जा सके।

नई दिल्ली और होर्मुज स्ट्रेट(Hormuz Strait) से जुड़ी स्थिति पर नजर रखते हुए अधिकारियों ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसके साथ ही भारत ने तेल सप्लाई के स्रोतों(Fuel) को बढ़ाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहा तो आम लोगों पर असर दिख सकता है

सरकार और कंपनियों के सामने तीन रास्ते

बीपीसीएल के अधिकारी ने बताया कि पहला विकल्प ईंधन की कीमतें बढ़ाना है। दूसरी ओर तेल कंपनियां घाटा खुद उठाकर कीमतें स्थिर रख सकती हैं। तीसरा विकल्प सरकार द्वारा वित्तीय सहायता देना माना जा रहा है ताकि कंपनियों पर दबाव कम किया जा सके। इसी कारण नीति निर्माताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।

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सप्लाई बढ़ाने पर दिया जा रहा जोर

भारत ने रूस, अफ्रीका और अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाकर सप्लाई स्रोतों में विविधता लाई है। अधिकारियों के अनुसार पहले जहां सीमित सप्लाई पॉइंट थे, अब उनकी संख्या काफी बढ़ाई गई है। इसके अलावा इथेनॉल मिश्रण, बायो गैस और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधनों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है ताकि भविष्य में आयात पर निर्भरता घटाई जा सके।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका क्यों है?

वैश्विक ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति बनी रहती है तो ईंधन महंगा हो सकता है। इससे परिवहन और रोजमर्रा की लागत पर असर पड़ सकता है।

भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रहा है?

भारत विभिन्न देशों से तेल आयात बढ़ाकर सप्लाई स्रोतों का विस्तार कर रहा है। साथ ही इथेनॉल मिश्रण, बायो गैस और ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना है।

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