ब्रांड चयन में बनी पहली पसंद
मुंबई: देश के किशोर अब केवल पॉकेट मनी खर्च(Gen Alpha) करने तक सीमित नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 70% किशोर(Adolescent) पैसे कमाने के नए तरीके तलाश रहे हैं, जो उनकी उद्यमी सोच को दर्शाता है। साथ ही, 31% बच्चे अपनी पॉकेट मनी का एक बड़ा हिस्सा भविष्य के लिए बचाते हैं। वित्तीय फैसलों में उनकी गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 25% बच्चे कोई भी खर्च करने से पहले अपने माता-पिता से सलाह लेना जरूरी समझते हैं।
खरीदारी के फैसलों पर बड़ा प्रभाव
आज के बच्चे घरेलू खरीदारी के पैटर्न को बदल रहे हैं। करीब 66% बच्चे घर के रोजमर्रा के सामान, कपड़ों और मनोरंजन से जुड़े फैसलों को सीधे प्रभावित करते हैं। वे ब्रांड के प्रति वफादार रहने के बजाय फीचर्स को अधिक महत्व देते हैं; यही कारण है कि 42% बच्चे नया फीचर आने पर तुरंत ब्रांड बदल देते हैं। वे उत्पाद की उपयोगिता और उसके शैक्षिक मूल्य (Educational Value) को परखकर ही अपनी पसंद जाहिर करते हैं।
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डिजिटल पहुंच और सांस्कृतिक पसंद
जेन अल्फा की डिजिटल दुनिया पर मजबूत पकड़ है, जहां 73% बच्चों के पास स्मार्टफोन की पहुंच है और 82% बच्चे यूट्यूब का इस्तेमाल करते हैं। मनोरंजन के मामले में भी उनकी पसंद विविध है; जहां 21% बच्चे बॉलीवुड संगीत पसंद करते हैं, वहीं 16% बच्चे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ट्रेंडिंग गानों को सुनना पसंद करते हैं। शास्त्रीय नृत्य (16%) और बॉलीवुड स्टाइल डांस (26%) में भी उनकी खासी रुचि देखी गई है।
जेन अल्फा से क्या तात्पर्य है और देश की आबादी में इनकी कितनी हिस्सेदारी है?
उन बच्चों को जेन अल्फा कहा जाता है जिनका जन्म वर्ष 2010 के बाद हुआ है। वर्तमान में ये बच्चे भारत की कुल आबादी का लगभग एक चौथाई (25%) हिस्सा हैं।
आज के किशोर ब्रांड चुनते समय किन बातों को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं?
आज के किशोर उत्पाद के आकर्षण से ज्यादा उसके फीचर्स, उपयोगिता (34%) और शैक्षिक मूल्य (34%) को महत्व देते हैं। बेहतर फीचर्स मिलने पर वे आसानी से ब्रांड स्विच करने के लिए भी तैयार रहते हैं।
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