₹1.55 लाख के पार पहुंचा गोल्ड
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में 19 फरवरी को सोने(Gold) और चांदी की कीमतों ने एक बार फिर लंबी छलांग लगाई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹3,151 बढ़कर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। चांदी में भी जबरदस्त तेजी देखी गई और यह ₹8,432 महंगी होकर ₹2.45 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक सोने में ₹21,000 से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो निवेशकों के लिए सोने को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में स्थापित कर रही है।
कीमतें बढ़ने के मुख्य कारण: वैश्विक तनाव और मार्जिन में राहत
कीमतों में इस अचानक उछाल के पीछे चार प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। पहला, MCX-NSE द्वारा गोल्ड-सिल्वर फ्यूचर्स पर से एक्स्ट्रा मार्जिन हटाना, जिससे ट्रेडिंग सस्ती हुई है। दूसरा, रूस-यूक्रेन वार्ता विफल होने और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने(Gold) की ओर भाग रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के संकेतों और हालिया गिरावट के बाद हुई ‘लो-लेवल बाइंग’ (सस्ते में खरीदारी) ने भी कीमतों को ऊपर धकेलने का काम किया है।
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स्मार्ट खरीदारी और शुद्धता की पहचान: ग्राहकों के लिए जरूरी टिप्स
सोना खरीदते समय धोखाधड़ी से बचने के लिए BIS हॉलमार्क (अल्फान्यूमेरिक कोड) वाले सर्टिफाइड गोल्ड को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। चांदी की शुद्धता(Gold) जांचने के लिए ग्राहक घर पर ही आसान टेस्ट कर सकते हैं, जैसे कि मैग्नेट टेस्ट (असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती) और आइस टेस्ट (असली चांदी पर बर्फ तेजी से पिघलती है)। साथ ही, अलग-अलग शहरों में ट्रांसपोर्टेशन खर्च और स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन के नियमों के कारण सोने के रेट में मामूली अंतर हो सकता है, इसलिए खरीदारी से पहले IBJA की वेबसाइट पर रेट क्रॉस-चेक करना फायदेमंद रहता है।
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों होते हैं?
इसके मुख्य चार कारण हैं: शहरों के बीच ट्रांसपोर्टेशन और सुरक्षा का खर्च, स्थानीय स्तर पर खरीदारी की मात्रा (बल्क डिस्काउंट), स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन के अपने नियम और ज्वेलर्स के पास मौजूद पुराने स्टॉक की खरीद कीमत।
घर पर असली चांदी की पहचान कैसे की जा सकती है?
असली चांदी की पहचान ‘मैग्नेट टेस्ट’ (चुंबक से नहीं चिपकना), ‘आइस टेस्ट’ (बर्फ का तेजी से पिघलना), ‘स्मेल टेस्ट’ (कोई गंध न होना) और ‘क्लॉथ टेस्ट’ (सफेद कपड़े पर रगड़ने से काला निशान आना) के जरिए की जा सकती है।
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