ड्यूटी में 100% की भारी कटौती
नई दिल्ली: भारत(India) और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर मात्र 10% कर दिया गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जो पूरी तरह से विदेश में बनी (CBU) लग्जरी गाड़ियाँ खरीदना चाहते हैं। हालांकि, सरकार ने स्थानीय उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सालाना 2.5 लाख गाड़ियों का कोटा निर्धारित किया है, ताकि घरेलू बाजार में संतुलन बना रहे।
मर्सिडीज और BMW पर क्या होगा असर?
मर्सिडीज-बेंज, ऑडी और BMW जैसी कंपनियों की जो कारें पहले से भारत में असेंबल (CKD) हो रही हैं, उनकी कीमतों में बहुत बड़ा अंतर नहीं आएगा(India) क्योंकि उन पर पहले से ही टैक्स कम था। लेकिन, इनके हाई-एंड मॉडल्स, स्पोर्ट्स कारें और स्पेशल एडिशन, जो सीधे यूरोप से बनकर आते थे, उनकी कीमतों में लाखों रुपए की कमी आएगी। यह समझौता भारतीय बाजार में फोक्सवैगन और लग्जरी ब्रांड्स के लिए अपनी पकड़ मजबूत करने का एक सुनहरा अवसर है।
अन्य पढ़े: सोने-चांदी में ऐतिहासिक उछाल
व्यापारिक संबंध और भविष्य की राह
भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। इस समझौते से भारत(India) और EU के बीच का व्यापार, जो पहले ही 190 अरब डॉलर को पार कर चुका है, आने वाले समय में दोगुना होने की उम्मीद है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) को शुरुआती 5 सालों के लिए इस छूट से बाहर रखा गया है, ताकि टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसे घरेलू निर्माताओं को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होने का समय मिल सके।
क्या इस समझौते से सभी विदेशी कारें सस्ती हो जाएंगी?
नहीं, यह छूट केवल यूरोपीय संघ (EU) के देशों (जैसे जर्मनी, फ्रांस, इटली आदि) से आने वाली कारों पर लागू होगी। अमेरिका या जापान से आने वाली कारों पर पुरानी दरें ही लागू रहेंगी जब तक उनके साथ अलग से कोई समझौता न हो।
सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर ड्यूटी कम क्यों नहीं की?
सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने और टाटा व महिंद्रा जैसे भारतीय(India) EV निर्माताओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को अगले 5 वर्षों तक इस कटौती से बाहर रखा है।
अन्य पढ़े: