रूस के बजाय अब अमेरिका और वेनेजुएला पर जोर
नई दिल्ली: भारत सरकार (India) ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए सरकारी तेल कंपनियों को अमेरिका और वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील के बाद यह कदम उठाया गया है। भारत अपनी तेल आपूर्ति(Oil Supply) के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है ताकि वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच ऊर्जा संकट से बचा जा सके। सरकारी कंपनियों ने हाल ही में वेनेजुएला से करीब 40 लाख बैरल तेल खरीदा है, जो इस नई दिशा का स्पष्ट संकेत है।
चुनौतियां और रिफाइनिंग क्षमता: क्या आसान होगा यह बदलाव?
अमेरिकी तेल की ओर रुख करना भारत(India) के लिए तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। भारतीय रिफाइनरीज मुख्य रूप से ‘मीडियम क्रूड’ के लिए डिजाइन की गई हैं, जबकि अमेरिकी तेल ‘लाइट और स्वीट’ (कम सल्फर वाला) होता है। इसके अलावा, अमेरिका से भारत की लंबी दूरी के कारण मालभाड़ा (Freight Rates) अधिक पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। इसके विपरीत, वेनेजुएला का तेल ‘हैवी-सौर’ होता है, जिसे प्रोसेस करने में भारतीय रिफाइनरीज माहिर हैं, लेकिन वहां की राजनीतिक स्थिति और अमेरिकी प्रतिबंध व्यापार को जटिल बनाते हैं।
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वेनेजुएला के साथ पुराने रिश्तों की वापसी
भारत ने 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला से तेल लेना बंद कर दिया था, लेकिन 2024 से इसमें फिर से तेजी आई है। वेनेजुएला के पास दुनिया(India) का सबसे बड़ा तेल भंडार है। साल 2025 में भारत का वेनेजुएलाई तेल आयात बढ़कर करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। सरकार ने अब कंपनियों को प्राइवेट डील के जरिए वेनेजुएला से क्रूड मंगाने की छूट दी है। इस कदम का उद्देश्य रूसी तेल पर निर्भरता कम करना और अमेरिकी प्रशासन के साथ हुए व्यापार समझौतों का सम्मान करना है।
‘लाइट-स्वीट’ और ‘हैवी-सौर’ कच्चे तेल में क्या मुख्य अंतर है?
अमेरिका से मिलने वाला ‘लाइट-स्वीट’ तेल पतला होता है और इसमें सल्फर कम होता है, जिससे पेट्रोल-डीजल निकालना आसान है पर यह महंगा होता है। वहीं, रूस और वेनेजुएला का ‘हैवी-सौर’ तेल गाढ़ा और अधिक सल्फर वाला होता है। भारतीय रिफाइनरीज इस भारी तेल को कुशलता से साफ करने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित हैं।
भारत अमेरिका से तेल आयात को कितना बढ़ाने का लक्ष्य रख रहा है?
भारत(India) का लक्ष्य अमेरिका से अपने कच्चे तेल के आयात को लगभग दोगुना करना है। पिछले साल के 2.25 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले अब इसे बढ़ाकर 4 लाख बैरल प्रतिदिन करने की योजना है, बशर्ते कीमतें और कूटनीतिक परिस्थितियां अनुकूल रहें।
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