तिजोरियों में बंद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
नई दिल्ली: भारतीय घरों और मंदिरों में दबा 50,000 टन सोना (Gold Power) केवल एक धातु नहीं, बल्कि 10 ट्रिलियन डॉलर ($10 Trillion) की एक विशाल अर्थव्यवस्था है। यह राशि इतनी बड़ी है कि अगर भारत(India) के इस निजी सोने को एक देश मान लिया जाए, तो अमेरिका और चीन के बाद यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। दिलचस्प बात यह है कि यह दुनिया के टॉप-10 केंद्रीय बैंकों के कुल भंडार से भी अधिक है, जो भारतीयों के सोने के प्रति गहरे भरोसे और सांस्कृतिक लगाव को प्रमाणित करता है।
डेड इन्वेस्टमेंट से इकोनॉमिक इंजन बनने की क्षमता
एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में यह सोना एक ‘डेड इन्वेस्टमेंट’ (स्थिर निवेश) की तरह है क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा गहनों के रूप में तिजोरियों में बंद है। यदि भारत अपनी ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ के माध्यम से इस सोने का केवल 2% हिस्सा भी बैंकिंग सिस्टम या मुख्यधारा के व्यापार(Business) में लाने में सफल रहता है, तो 2047 तक भारत की जीडीपी में 7.5 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त इजाफा हो सकता है। इससे भारत की विकसित राष्ट्र बनने की राह और भी आसान हो जाएगी।
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बदलता नजरिया: अब मजबूरी नहीं, व्यापार का आधार है गोल्ड लोन
हाल के वर्षों में भारतीयों का सोने के प्रति नजरिया बदला है। अब सोना सिर्फ मुसीबत का साथी नहीं, बल्कि व्यापार विस्तार का जरिया बन गया है। नवंबर 2025 तक ₹24.34 लाख करोड़ का गोल्ड लोन लिया जाना इस बात का सबूत है कि लोग अब सोने को उत्पादक कार्यों (खेती, छोटे बिजनेस और इंफ्रास्ट्रक्चर) के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, ज्वेलरी के रूप में रखे 80% सोने को लोग आज भी बेचना पसंद नहीं करते, जिसके कारण कीमतों में उछाल का सीधा असर बाजार की खपत (Consumption) पर कम ही दिखता है।
भारतीय घरों में रखा सोना भारत की जीडीपी और बैंक डिपॉजिट की तुलना में कहां खड़ा है?
भारतीय घरों में रखे सोने की वैल्यू लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है, जो भारत की कुल जीडीपी का 125% है। यदि इसकी तुलना बैंक डिपॉजिट और शेयर बाजार में लगे पैसे से की जाए, तो सोने की वैल्यू इनसे 175% अधिक है, जो दिखाता है कि भारतीयों का सबसे बड़ा निवेश सोना ही है।
क्या सोने की बढ़ती कीमतों से आम भारतीयों की खरीदारी की क्षमता बढ़ती है?
तकनीकी रूप से नहीं। चूंकि भारत में 75-80% सोना ज्वेलरी के रूप में है जिसे लोग भावनात्मक जुड़ाव और परंपरा के कारण बेचना नहीं चाहते, इसलिए सोने के दाम बढ़ने पर लोग खुद को अमीर तो महसूस करते हैं (वेल्थ इफेक्ट), लेकिन वे इसे बेचकर बाजार में खर्च नहीं करते। इसीलिए रोजमर्रा की खरीदारी पर इसका खास असर नहीं पड़ता।
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