Indian Auto Sector: भारतीय ऑटो सेक्टर की रिकॉर्ड तोड़ रफ़्तार

By Dhanarekha | Updated: March 13, 2026 • 2:31 PM

फरवरी 2026 में बिक्री के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त

नई दिल्ली: फरवरी 2026 में भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री(Indian Auto Sector) ने अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन किया है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के अनुसार, इस तेजी का मुख्य चालक टू-व्हीलर सेगमेंट रहा, जिसकी बिक्री में 35.2% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई। स्कूटरों की मांग में 42.3% और मोटरसाइकिलों की बिक्री में 30.8% का उछाल आया। यह वृद्धि दर्शाती है कि ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में दोपहिया वाहनों की मांग चरम पर है

पैसेंजर और थ्री-व्हीलर वाहनों में भी मजबूती

केवल टू-व्हीलर ही नहीं, बल्कि पैसेंजर व्हीकल (PV) और थ्री-व्हीलर सेगमेंट ने भी बाजार में जोश भरा है। पैसेंजर वाहनों की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 10.6% बढ़कर 4,17,705 यूनिट तक पहुँच गई। वहीं, थ्री-व्हीलर सेगमेंट ने 29% की वृद्धि दर्ज की, जिसमें पैसेंजर कैरियर(Indian Auto Sector) कैटेगरी का विशेष योगदान रहा। यह आंकड़े भारतीय उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रय शक्ति और आवाजाही के साधनों के प्रति उनके सकारात्मक रुख को दर्शाते हैं।

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भू-राजनीतिक तनाव और भविष्य की चुनौतियाँ

रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद, उद्योग जगत भविष्य को लेकर सतर्क है। ईरान-अमेरिका संघर्ष और पश्चिम एशिया के तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन और निर्यात(Indian Auto Sector) के लिए जोखिम पैदा कर दिया है। ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि मार्च में वित्तीय वर्ष के अंत और त्योहारों के कारण बिक्री और बढ़ सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय ऑटो सेक्टर की इस रफ़्तार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।

फरवरी 2026 में टू-व्हीलर सेगमेंट की बिक्री में कितनी वृद्धि दर्ज की गई?

फरवरी 2026 में टू-व्हीलर की बिक्री में 35.2% की वृद्धि हुई, जिससे यह बढ़कर 18,71,406 यूनिट पहुँच गई। इसमें स्कूटर की बिक्री में 42.3% और मोटरसाइकिल में 30.8% का उछाल देखा गया।

ऑटो इंडस्ट्री के विशेषज्ञों ने भविष्य के लिए क्या चेतावनी दी है?

विशेषज्ञों और SIAM ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे संघर्ष और ईरान युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन और निर्यात प्रभावित हो सकता है, जो आने वाले समय में ऑटो सेक्टर के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

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