विकास की रफ्तार और महंगाई पर लगाम
नई दिल्ली: आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत(Indian Economy) की जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है, जो वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखेगा। सबसे राहत की बात महंगाई को लेकर है, खरीफ और रबी की रिकॉर्ड पैदावार की बदौलत महंगाई दर 4% के सुरक्षित दायरे में रहने की उम्मीद है। सरकार का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) कम होना इस बात का संकेत है कि देश की आर्थिक सेहत पहले से अधिक अनुशासित और मजबूत हुई है।
रोजगार के अवसर और कौशल विकास पर जोर
देश की 56 करोड़ की वर्कफोर्स(Workforce) के लिए सर्वे में सकारात्मक संकेत हैं। विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 6% की सालाना बढ़ोतरी और 10 लाख नई नौकरियों का जुड़ना एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, सरकार(Indian Economy) ने युवाओं की स्किल और कंपनियों की जरूरतों के बीच के ‘गैप’ को एक चुनौती माना है। इसके समाधान के लिए स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग और एक ‘इंटीग्रेटेड डिजिटल डेटा सिस्टम’ बनाने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार सही काम मिल सके और गिग इकोनॉमी का भी विस्तार हो।
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विदेशी व्यापार और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार
अमेरिकी टैरिफ की चुनौतियों और वैश्विक ट्रेड वॉर के खतरों के बीच भी भारत का एक्सपोर्ट 825.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना हमारी व्यापारिक लचीलेपन को दर्शाता है। भारत(Indian Economy) का विदेशी मुद्रा भंडार 701 बिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है, जो किसी भी बाहरी आर्थिक झटके से बचने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच (Buffer) का काम करेगा। यह भंडार न केवल रुपए की स्थिति को स्थिर रखेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों के भरोसे को भी बढ़ाएगा।
‘राजकोषीय घाटा’ क्या है और इसका कम होना हमारे लिए क्यों अच्छा है?
जब सरकार अपनी कुल कमाई (राजस्व) से ज्यादा पैसा खर्च करती है, तो उस अंतर को ‘राजकोषीय घाटा’ कहते हैं। सर्वे के अनुसार, सरकार ने इसे वित्त वर्ष 2026 तक 4.4% पर लाने का लक्ष्य रखा है। घाटा कम होने का मतलब है कि सरकार को बाजार से कम कर्ज लेना पड़ेगा, जिससे ब्याज दरें स्थिर रहेंगी और अर्थव्यवस्था में निवेश के लिए ज्यादा पैसा उपलब्ध होगा।
अमेरिकी टैरिफ (50%) के बावजूद भारत का एक्सपोर्ट कैसे बढ़ रहा है?
भारत(Indian Economy) का एक्सपोर्ट बढ़ने का मुख्य कारण निर्यात बाजारों का विविधीकरण और सर्विस एक्सपोर्ट में आई 6.5% की तेजी है। भारत अब केवल पारंपरिक सामानों पर निर्भर नहीं है; सॉफ्टवेयर, आईटी और कंसल्टेंसी सेवाओं की वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है। साथ ही, घरेलू स्तर पर नियमों के सरलीकरण ने भारतीय सामानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखा है।
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