ఐటీ స్టాక్స్‌లో ‘ఏఐ’ ప్రకంపనలు.. కుప్పకూలిన ఇన్ఫోసిస్, టీసీఎస్ షేర్లు మళ్లీ పెరిగిన బంగారం ధరలు, ఇవాళ రేట్లు చూసారా చిల్లర కష్టాలకు చెక్: ఏటీఎంల నుంచి ఇకపై రూ.10, రూ.20 నోట్లు! ఆధార్ యూజర్లకు గుడ్ న్యూస్ భారీగా పెరిగిన బంగారం ధరలు ఖాదీ మహోత్సవంలో రికార్డు సేల్స్ యూజర్లకు జియో శుభవార్త RBI మరోసారి వడ్డీ రేట్లు తగ్గించే ఛాన్స్ నష్టాల బాటలో దేశీయ స్టాక్ మార్కెట్లు చారిత్రాత్మక కార్ల రికార్డు బ్యాంక్ ఖాతాలు క్లోజ్! పెరిగిన గ్యాస్ సిలిండర్ ధరలు ఐటీ స్టాక్స్‌లో ‘ఏఐ’ ప్రకంపనలు.. కుప్పకూలిన ఇన్ఫోసిస్, టీసీఎస్ షేర్లు మళ్లీ పెరిగిన బంగారం ధరలు, ఇవాళ రేట్లు చూసారా చిల్లర కష్టాలకు చెక్: ఏటీఎంల నుంచి ఇకపై రూ.10, రూ.20 నోట్లు! ఆధార్ యూజర్లకు గుడ్ న్యూస్ భారీగా పెరిగిన బంగారం ధరలు ఖాదీ మహోత్సవంలో రికార్డు సేల్స్ యూజర్లకు జియో శుభవార్త RBI మరోసారి వడ్డీ రేట్లు తగ్గించే ఛాన్స్ నష్టాల బాటలో దేశీయ స్టాక్ మార్కెట్లు చారిత్రాత్మక కార్ల రికార్డు బ్యాంక్ ఖాతాలు క్లోజ్! పెరిగిన గ్యాస్ సిలిండర్ ధరలు

Inflation: महंगाई का दोहरा प्रहार

Author Icon By Dhanarekha
Updated: March 16, 2026 • 3:20 PM
వాట్సాప్‌లో ఫాలో అవండి

थोक महंगाई 1 साल के उच्चतम स्तर 2.13% पर पहुंची

नई दिल्ली: फरवरी 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 2.13% हो गई है, जो पिछले 12 महीनों(Inflation) का सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहा तनाव लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इससे न केवल पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, बल्कि माल ढुलाई की लागत बढ़ने से फल, सब्जी और हर जरूरी सामान की कीमतें भी आसमान छूने लगेंगी

खाने-पीने और रोजमर्रा के सामान में उछाल

ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई 2.21% से बढ़कर 3.27% हो गई है। सबसे ज्यादा असर फूड इंडेक्स पर पड़ा है, जो पिछले महीने के नकारात्मक स्तर(Negative Level) से उछलकर 1.85% पर आ गया है। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स(Inflation) और फ्यूल-पावर की दरों में भी बढ़त देखी गई है, जिसका मतलब है कि आने वाले समय में फैक्ट्री से निकलने वाला सामान भी महंगा होने वाला है।

अन्य पढ़े: सेंसेक्स 100 अंक चढ़कर 74,700 पर

थोक महंगाई (WPI) और आम जनता पर प्रभाव

इसका सीधा असर आम आदमी पर तब पड़ता है जब कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। WPI में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का हिस्सा सबसे ज्यादा (64.23%) होता है। अगर थोक कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो खुदरा महंगाई(Inflation) भी बढ़ती है। फिलहाल रिटेल महंगाई भी बढ़कर 3.21% पर पहुंच गई है, जो यह संकेत देती है कि घर का बजट संभालना अब और चुनौतीपूर्ण होगा।

थोक महंगाई (WPI) और रिटेल महंगाई (CPI) में मुख्य अंतर क्या है?

इसका (WPI) उन कीमतों को मापती है जो व्यापारी थोक बाजार में एक-दूसरे से लेते हैं, जबकि रिटेल महंगाई (CPI) उन कीमतों पर आधारित होती है जो आम ग्राहक सामान खरीदते समय चुकाते हैं।

ईरान-इजराइल युद्ध का भारत में महंगाई पर क्या असर पड़ सकता है?

युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ जाता है, जिससे अंततः फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान महंगे हो जाते हैं।

अन्य पढ़े:

#Breaking News in Hindi #EconomyNews #GlobalCrisisImpact #GoldAndOilPrices #Google News in Hindi #Hindi News Paper #InflationAlert #MarketUpdate #WPIIndia

గమనిక: ఈ వెబ్ సైట్ లో ప్రచురించబడిన వార్తలు పాఠకుల సమాచార ప్రయోజనాల కోసం ఉద్దేశించి మాత్రమే ఇస్తున్నాం. మావంతుగా యధార్థమైన సమాచారాన్ని ఇచ్చేందుకు కృషి చేస్తాము.