LPG Crisis: एलपीजी संकट और पीएनजी का बढ़ता दायरा

Read Time:  1 min
LPG Crisis
LPG Crisis
FONT SIZE
GET APP

महाराष्ट्र-गुजरात देश में सबसे आगे

नई दिल्ली: देश में 31 जनवरी 2026 तक कुल 1.62 करोड़ पीएनजी कनेक्शन दर्ज किए गए हैं, जिनमें से आधे से अधिक हिस्सेदारी अकेले महाराष्ट्र और गुजरात की है। महाराष्ट्र 43.4 लाख (26%) कनेक्शन के साथ शीर्ष पर है, जबकि गुजरात 37.8 लाख के साथ दूसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश तीसरे(LPG Crisis) और दिल्ली चौथे स्थान पर है। दिलचस्प तथ्य यह है कि तमिलनाडु और केरल(Kerala) जैसे विकसित राज्य अभी भी टॉप 10 की सूची से बाहर हैं। सरकार के अनुसार, पिछले एक महीने में ही 8 लाख नए पीएनजी उपभोक्ता जुड़े हैं, जो ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत है

एलपीजी बनाम पीएनजी: निर्भरता और आपूर्ति का अंतर

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों के लिए काफी हद तक मिडिल ईस्ट(Middle East) और ‘होर्मुज की खाड़ी’ वाले रूट पर निर्भर है, जो युद्ध के कारण वर्तमान में बाधित है। इसके विपरीत, पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) सीधे पाइपलाइनों के जरिए किचन तक पहुंचती है। जहाँ एलपीजी को कच्चे तेल से रिफाइन किया जाता है, वहीं पीएनजी प्राकृतिक गैस है जो एलएनजी (LNG) के रूप में भारत आती है। वर्तमान में देश में 33.2 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं, लेकिन सप्लाई की किल्लत को देखते हुए सरकार उन क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर बंद कर रही है जहाँ पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है।

अन्य पढ़े: Crude Oil: कच्चा तेल $110 के पार

सरकार के कदम और भविष्य की रणनीति

युद्ध के कारण बढ़ती किल्लत को देखते हुए सरकार ने पीएनजी में शिफ्ट होने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पिछले कुछ दिनों में 16,000 से अधिक एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किए गए हैं। इसके(LPG Crisis) साथ ही, छोटे परिवारों और तात्कालिक जरूरतों के लिए सरकारी कंपनियों ने ‘छोटू सिलेंडर’ (5 किलो) की बिक्री भी बढ़ाई है, जिसकी 6.6 लाख यूनिट्स हाल ही में बेची गई हैं। सरकार का लक्ष्य आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम कर स्वदेशी और पाइपलाइन आधारित गैस नेटवर्क को मजबूत करना है।

एलपीजी (LPG) और पीएनजी (PNG) में मुख्य अंतर क्या है?

एलपीजी कच्चे तेल के शोधन से प्राप्त होती है और सिलेंडरों में भरकर सप्लाई की जाती है, जबकि पीएनजी एक प्राकृतिक गैस है जो भूमिगत पाइपलाइनों के माध्यम से सीधे घर तक पहुँचती है। पीएनजी की आपूर्ति अधिक निरंतर और सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि इसके लिए सिलेंडर खत्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ता।

ईरान युद्ध का भारत की गैस सप्लाई पर क्या असर पड़ रहा है?

भारत एलपीजी आयात के लिए मिडिल ईस्ट के देशों और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जलमार्ग पर निर्भर है। युद्ध के कारण यह मार्ग बाधित हुआ है, जिससे एलपीजी की सप्लाई में भारी कमी आई है। इसी वजह से सरकार पीएनजी को प्राथमिकता दे रही है क्योंकि इसका आयात और वितरण तंत्र एलपीजी से अलग है।

अन्य पढ़े:

Dhanarekha

लेखक परिचय

Dhanarekha

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।