वकील ने आकाश और ईशा अंबानी के खिलाफ दायर किया केस
पानीपत: पानीपत(Panipat) जिला कोर्ट परिसर में मोबाइल सिग्नल(Mobile Signal) की भारी किल्लत से तंग आकर वकीलों ने अब कानूनी लड़ाई का रास्ता अपनाया है। रिलायंस जियो की खराब सेवाओं के कारण अदालती कामकाज में हो रही देरी को देखते हुए लोक अदालत में याचिका दायर की गई है, जिसने कॉर्पोरेट जगत में हलचल मचा दी है।
नेटवर्क की समस्या और अंबानी परिवार को समन
पानीपत(Panipat) के एडवोकेट अमित राठी(Amit Rathi) ने जियो नेटवर्क की खराब सेवाओं के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में याचिका दायर की है। इस मामले में उन्होंने रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी और मैनेजिंग डायरेक्टर ईशा अंबानी को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार (पार्टी) बनाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोर्ट परिसर और वकील चैंबरों में सिग्नल पूरी तरह गायब रहते हैं। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रतिवादियों को समन जारी कर 20 फरवरी तक जवाब तलब किया है।
अदालती कामकाज पर बुरा असर
वकीलों का कहना है कि डिजिटल इंडिया के दौर में जब कोर्ट के अधिकांश काम ऑनलाइन होते हैं, तब नेटवर्क न होना एक बड़ी बाधा है। याचिका में चार मुख्य समस्याओं का जिक्र किया गया है: कॉल ड्रॉप के कारण मुवक्किलों से बात न हो पाना, ऑनलाइन कोर्ट(Panipat) ऑर्डर चेक न कर पाना, ओटीपी न आने के कारण स्टांप ड्यूटी और कोर्ट फीस का भुगतान अटकना, और कानूनी डेटाबेस तक पहुंच न होना। स्थिति इतनी खराब है कि वकीलों को एक कॉल करने के लिए बिल्डिंग से बाहर खुले मैदान में जाना पड़ता है।
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फेसबुक साक्ष्य और कानूनी आधार
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब एक वकील अपने क्लाइंट द्वारा फेसबुक पर दिए गए सबूतों को नेटवर्क न होने के कारण कोर्ट में नहीं दिखा सके। इसके बाद ‘लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट, 1987’ की धारा 22-C के तहत यह आवेदन किया गया। पानीपत(Panipat) बार एसोसिएशन के अन्य वकीलों ने भी इस कदम का समर्थन किया है। उनका तर्क है कि टेलीकॉम कंपनियां ट्राई (TRAI) के नियमों के तहत बेहतर सेवा देने के लिए बाध्य हैं और जिला मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर नेटवर्क फेल होना बड़ी लापरवाही है।
वकील ने इस मामले में रिलायंस जियो के शीर्ष अधिकारियों को पक्षकार क्यों बनाया है?
एडवोकेट अमित राठी का तर्क है कि कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अपनी सेवाओं की गुणवत्ता और प्रबंधन के लिए अंतिम रूप से जिम्मेदार हैं। चूंकि स्थानीय स्तर(Panipat) पर शिकायतों का कोई समाधान नहीं हुआ, इसलिए शीर्ष अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने के लिए उन्हें प्रतिवादी बनाया गया है।
खराब नेटवर्क के कारण अदालती कार्यवाही में किस तरह की तकनीकी बाधाएं आ रही हैं?
खराब नेटवर्क के कारण सबसे बड़ी बाधा वित्तीय लेनदेन में आ रही है। बैंक ओटीपी न मिलने से कोर्ट फीस और चालान का भुगतान नहीं हो पाता, जिससे केस की सुनवाई में देरी होती है। इसके अलावा ऑनलाइन केस स्टेटस देखना और डिजिटल साक्ष्य पेश करना भी मुश्किल हो गया है।
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