Phonepe: फोनपे आईपीओ

By Dhanarekha | Updated: January 22, 2026 • 2:04 PM

₹12,000 करोड़ जुटाने की तैयारी और निवेशकों का एग्जिट प्लान

मुंबई: मार्केट रेगुलेटर सेबी ने फोनपे(Phonepe) के ₹12,000 करोड़ के आईपीओ को हरी झंडी दे दी है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, जिसका अर्थ है कि कंपनी नए शेयर जारी कर पूंजी नहीं जुटाएगी, बल्कि वर्तमान निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। इस प्रक्रिया में माइक्रोसॉफ्ट और टाइगर ग्लोबल जैसे दिग्गज निवेशक कंपनी से पूरी तरह बाहर (Exit) हो जाएंगे, जबकि मुख्य प्रमोटर वॉलमार्ट अपनी हिस्सेदारी में कटौती करेगा

हिस्सेदारी में बदलाव और वैल्यूएशन का गणित

अमेरिकी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट, जो फोनपे(Phonepe) की 71.77% मालिक है, इस आईपीओ के जरिए अपनी 9.06% हिस्सेदारी बेच रही है। इसके साथ ही माइक्रोसॉफ्ट और टाइगर ग्लोबल अपने करीब 47 लाख शेयर बेचकर कंपनी से विदा लेंगे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फोनपे करीब $15 बिलियन (₹1.37 लाख करोड़) की वैल्यूएशन का लक्ष्य लेकर चल रहा है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो लिस्टिंग के मामले में यह पेटीएम के बाद दूसरी सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट कंपनी बन जाएगी।

मजबूत वित्तीय सुधार और बाजार में दबदबा

आईपीओ से पहले फोनपे(Phonepe) की वित्तीय स्थिति में जबरदस्त सुधार देखा गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का रेवेन्यू 41% बढ़कर ₹7,148.6 करोड़ हो गया है। सबसे सकारात्मक बात यह है कि कंपनी का घाटा भी कम होकर ₹1,720 करोड़ रह गया है और ईएसओपी (ESOP) खर्चों को हटाकर कंपनी ₹630 करोड़ के एडजस्टेड मुनाफे में आ चुकी है। यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन के मामले में फोनपे 45% से अधिक बाजार हिस्सेदारी के साथ निर्विवाद रूप से नंबर-1 पर बनी हुई है।

अन्य पढ़े: चीन नीति में भारत का बड़ा बदलाव

लिस्टिंग की समयसीमा और भविष्य की योजना

सेबी की मंजूरी(Phonepe) के बाद अब कंपनी जल्द ही रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास अपना आरएचपी जमा करेगी। उम्मीद है कि साल 2026 के मध्य तक फोनपे के शेयर बाजार में ट्रेड करना शुरू कर देंगे। कंपनी अब केवल पेमेंट तक सीमित नहीं है; यह इंश्योरेंस, स्टॉक ब्रोकिंग और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रही है, जो भविष्य के निवेशकों के लिए इसे एक आकर्षक विकल्प बनाता है।

क्या फोनपे आईपीओ से आने वाला पैसा कंपनी के बिजनेस में इस्तेमाल होगा?

नहीं, चूंकि यह एक ‘ऑफर फॉर सेल’ (Phonepe) आईपीओ है, इसलिए इससे मिलने वाली पूरी राशि उन मौजूदा निवेशकों (जैसे वॉलमार्ट, माइक्रोसॉफ्ट) को मिलेगी जो अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। कंपनी को इससे कोई नई पूंजी प्राप्त नहीं होगी।

पेटीएम के मुकाबले फोनपे का आईपीओ कितना बड़ा है?

फोनपे ₹12,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रहा है, जबकि पेटीएम का आईपीओ ₹18,300 करोड़ का था। हालांकि, 45% यूपीआई मार्केट शेयर और सुधरते मुनाफे के कारण निवेशक फोनपे से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं।

अन्य पढ़े:

#Breaking News in Hindi #DigitalPaymentsIndia #FintechNews #Google News in Hindi #Hindi News Paper #PhonePeIPO #SEBIApproval #StockMarketUpdate2026 #WalmartStake