Breaking News: Ray Dalio: भारत पर अरबपति का बड़ा दांव

By Dhanarekha | Updated: December 23, 2025 • 7:45 PM

बदलती दुनिया में भारत की बढ़त

नई दिल्‍ली: दिग्गज निवेशक रे डेलियो(Ray Dalio) का मानना है कि वैश्विक व्यवस्था निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अब नियमों से ज्यादा तकनीक, आत्मनिर्भरता और घरेलू ताकत मायने रखती है। एक बातचीत में उन्होंने कहा कि मौजूदा दशक में भारत अपनी चुनौतियों के बावजूद तेज़ी से उभरने वाली अर्थव्यवस्था बन सकता है। यह आकलन उस समय आया है जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है।

डेलियो के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था अब कमजोर पड़ चुकी है। अमेरिका(United States) और चीन(China) के बीच बढ़ते तनाव ने सहयोग आधारित ढांचे को पीछे धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि संस्थागत नियमों के बजाय अब शक्ति और तकनीकी क्षमता परिणाम तय कर रही है। लेकिन इस माहौल में भारत को एक अनोखा अवसर मिलता दिखाई देता है

बदलती वैश्विक व्यवस्था की तस्वीर

डेलियो का कहना है कि आज की दुनिया केवल सैन्य मोर्चे पर नहीं बंटी है। व्यापार, पूंजी प्रवाह और तकनीक भी संघर्ष के क्षेत्र बन चुके हैं। देशों के बीच भरोसा कम हुआ है और हर राष्ट्र अपनी निर्भरता घटाने में जुटा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल बड़े पैमाने पर युद्ध की संभावना सीमित है। हालांकि जोखिम पहले की तुलना में अधिक हैं, खासकर तब जब आंतरिक कमजोरियां बाहरी दबावों से जुड़ जाएं। यही कारण है कि देश अपनी आर्थिक और तकनीकी नींव मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।

तकनीक की जंग और शक्ति संतुलन

डेलियो के मुताबिक, आने वाले वर्षों में सबसे निर्णायक मुकाबला तकनीक का होगा। सेमीकंडक्टर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, तकनीकी बढ़त आर्थिक और सैन्य ताकत तय करेगी।

अमेरिका अत्याधुनिक नवाचार में आगे है, जबकि चीन बड़े पैमाने पर तकनीक को लागू करने में मजबूत दिखता है। इसलिए यह प्रतिस्पर्धा देशों को अपनी रणनीति दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर रही है, ताकि कमजोरियों का इस्तेमाल हथियार के रूप में न हो सके।

भारत की मजबूत बुनियाद

इस अस्थिर पृष्ठभूमि में भारत की स्थिति अलग नजर आती है। डेलियो मानते हैं कि देश एक शानदार विकास कर्व में प्रवेश कर रहा है। कम कर्ज, युवा प्रतिभा और तेज़ी से बढ़ता बुनियादी ढांचा इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।

भारत के पास क्रेडिट विस्तार, डिजिटल नेटवर्क और औपचारिक अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की बड़ी गुंजाइश है। यही तत्व अक्सर ऊंची विकास दर को जन्म देते हैं, जो अगले दशक में भारत को अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आगे ले जा सकते हैं।

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निवेशकों के लिए संदेश

डेलियो का जोर घरेलू स्वास्थ्य पर है। उनके अनुसार, मजबूत राजकोषीय अनुशासन और सामाजिक संतुलन किसी भी देश की असली ताकत होते हैं।

अगली पीढ़ी के निवेशकों को उन्होंने सलाह दी कि वे जल्दी शुरुआत करें, सीखते हुए आगे बढ़ें और मूल बातों को समझें। इस सोच के साथ भारत लंबे समय तक स्थिर विकास का लाभ उठा सकता है।

भारत को अन्य अर्थव्यवस्थाओं से अलग क्या बनाता है

भारत के पास कम कर्ज और विशाल युवा आबादी का संयोजन है। यह उसे तेजी से निवेश और सुधार लागू करने की क्षमता देता है। यही वजह है कि वैश्विक निवेशक इसे दीर्घकालिक अवसर मानते हैं।

तकनीकी प्रतिस्पर्धा का असर कैसे पड़ेगा

तकनीक में आत्मनिर्भरता देशों को अधिक सुरक्षित बनाती है। भारत यदि नवाचार और स्केल दोनों पर ध्यान देता है, तो वह वैश्विक शक्ति संतुलन में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

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