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Rupee: अमेरिकी बॉन्ड लहर से बढ़ी चिंता

Author Icon By Dhanarekha
Updated: May 21, 2026 • 7:00 PM
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वैश्विक बाजारों पर बढ़ा दबाव

नई दिल्‍ली: अमेरिका(US) और जापान में बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। रुपये(Rupee) में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और डॉलर के मुकाबले यह रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। वहीं सरकारी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ने से उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा है।

नई दिल्ली और मुंबई(Mumbai) के वित्तीय बाजारों में भी इस बदलाव पर नजर रखी जा रही है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं। इसके साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता को और बढ़ा दिया है

डॉलर की मजबूती से बढ़ा दबाव

अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ता ब्याज निवेशकों को आकर्षित कर रहा है क्योंकि उन्हें वहां ज्यादा सुरक्षित और स्थिर रिटर्न मिल रहा है। इसी कारण वैश्विक पूंजी डॉलर आधारित एसेट्स की ओर बढ़ रही है। इसका सीधा असर भारतीय रुपये(Rupee) और शेयर बाजार पर पड़ रहा है, जिससे मुद्रा कमजोर होती दिखाई दे रही है।

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महंगाई और आरबीआई पर नजर

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक तनाव ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भारतीय रिजर्व बैंक को भविष्य में सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। दूसरी ओर बाजार में यह भी माना जा रहा है कि आरबीआई फिलहाल रुपये के उतार-चढ़ाव में ज्यादा आक्रामक हस्तक्षेप नहीं करेगा।

बॉन्ड यील्ड बढ़ने का भारत पर क्या असर पड़ता है?

जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो विदेशी निवेशक सुरक्षित बाजारों की ओर पैसा ले जाते हैं। इससे भारत जैसे उभरते बाजारों से पूंजी निकलने लगती है। इसका असर रुपये, शेयर बाजार और निवेश माहौल पर पड़ता है।

रुपये में कमजोरी क्यों बढ़ रही है?

डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की महंगाई और विदेशी निवेश निकासी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक जोखिम वाले बाजारों से दूरी बना रहे हैं। इससे भारतीय मुद्रा पर लगातार दबाव बना हुआ है।

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