Share Market: शेयर बाजार: उतार-चढ़ाव के बीच लाल निशान पर बंद हुआ बाजार

By Dhanarekha | Updated: January 23, 2026 • 1:45 PM

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार(Share Market) में आज हलचल भरा(Bustling) दिन रहा। सपाट शुरुआत के बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी और बिकवाली के दबाव में नीचे आ गए। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और वैश्विक संकेतों ने बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

बाजार का हाल: शुरुआती बढ़त के बाद मुनाफावसूली

कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स ने 82,516.27 का उच्च स्तर छुआ, लेकिन निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (Profit Booking) करने के कारण इसमें गिरावट दर्ज की गई। सुबह 10 बजे तक सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 82,285.24 के स्तर पर आ गया। वहीं, एनएसई निफ्टी(Share Market) भी उतार-चढ़ाव के बीच 25,286.95 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। रिलायंस और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयरों में गिरावट ने सूचकांक पर दबाव बनाया।

रुपये में मजबूती और वैश्विक संकेत

वैश्विक मोर्चे पर भारतीय रुपये के लिए अच्छी खबर रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले(Share Market) रुपया 17 पैसे मजबूत होकर 91.41 पर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का टैरिफ धमकियों से पीछे हटना रहा, जिससे वैश्विक व्यापार युद्ध का डर कम हुआ। एशियाई बाजारों (जापान, दक्षिण कोरिया, हांगकांग) में तेजी देखी गई, जिससे भारतीय बाजार को कुछ सहारा मिला, लेकिन घरेलू बिकवाली हावी रही।

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निवेशकों की चाल: FII और DII का डेटा

बाजार में संस्थागत निवेशकों का मिला-जुला रुख देखने को मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाजार से दूरी बनाए रखी और गुरुवार को 2,549.80 करोड़ रुपये के शेयर(Share Market) बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को संभालने की कोशिश की और 4,222.98 करोड़ रुपये की खरीदारी की। कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में 0.80% की वृद्धि हुई, जो 64.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

आज के कारोबार में किन प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई?

सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में इटरनल, इंडिगो, अदानी पोर्ट्स, पावर ग्रिड, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

रुपये की मजबूती का मुख्य कारण क्या था?

रुपये की मजबूती का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा यूरोप पर लगाए जाने वाले टैरिफ की धमकियों(Share Market) से पीछे हटना था, जिससे निवेशकों के बीच व्यापार युद्ध की आशंका कम हुई और सेंटीमेंट में सुधार हुआ।

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