Smoke: बजट से पहले ही ‘धुआं’ हुई राहत

By Dhanarekha | Updated: January 31, 2026 • 5:06 PM

कल से सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला होंगे महंगे

नई दिल्ली: 1 फरवरी 2026 से सिगरेट और तंबाकू(Smoke) उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर (Health Cess) लागू होने जा रहा है। यह नया टैक्स GST की अधिकतम 40% की दर के ऊपर लगाया जाएगा। खास बात यह है कि अब टैक्स उत्पादन की मात्रा के बजाय मशीनों की उत्पादन क्षमता के आधार पर वसूला जाएगा। इसके अलावा, तंबाकू उत्पादों के लिए अब MRP आधारित मूल्यांकन की व्यवस्था शुरू होगी, जिससे टैक्स की चोरी रोकना आसान होगा

सिगरेट की लंबाई के आधार पर बढ़ी कीमतें

सरकार ने सिगरेट(Smoke) पर लगने वाले टैक्स को उसकी लंबाई और फिल्टर के आधार पर तय किया है। बिना फिल्टर वाली छोटी सिगरेट (65 मिमी तक) पर ₹2.05 प्रति स्टिक का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वहीं, 70-75 मिमी वाली लंबी सिगरेट पर ₹5.4 प्रति स्टिक तक टैक्स बढ़ाया गया है। सबसे प्रीमियम और खास बनावट वाली सिगरेट पर यह शुल्क ₹8.50 प्रति स्टिक तक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी बढ़ोतरी के कारण अगले वित्तीय वर्ष में सिगरेट की बिक्री में 6-8% की गिरावट आ सकती है।

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निगरानी सख्त: सीसीटीवी कैमरे और अनिवार्य पंजीकरण

टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार ने नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। अब पान मसाला(Smoke) निर्माताओं को नया पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। साथ ही, उन्हें अपनी सभी पैकिंग मशीनों पर CCTV प्रणाली लगानी होगी, जिसकी फुटेज को 24 महीनों तक सुरक्षित रखना होगा। यदि कोई मशीन 15 दिनों से ज्यादा बंद रहती है, तभी उत्पाद शुल्क में छूट मिलेगी। चबाने वाले तंबाकू और जर्दा पर अब 82% और गुटखा पर रिकॉर्ड 91% टैक्स लगेगा।

यह नया टैक्स सिगरेट और तंबाकू पर पहले से लग रहे GST से अलग कैसे है?

पहले इन उत्पादों पर 28% GST और क्षतिपूर्ति उपकर(Smoke) लगता था। 1 फरवरी से लागू होने वाला नया ‘स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर’ अब 40% की उच्चतम GST दर के ऊपर अतिरिक्त रूप से लगेगा, जो इसे पहले के मुकाबले काफी महंगा बना देगा।

पैकेट पर घोषित खुदरा बिक्री मूल्य (MRP) आधारित मूल्यांकन से क्या बदलेगा?

पहले टैक्स अक्सर घोषित उत्पादन मूल्य पर लगता था, जिसमें कंपनियां हेरफेर कर लेती थीं। अब टैक्स का निर्धारण सीधे उस कीमत (MRP) पर होगा जो पैकेट पर छपी है। इससे सरकार का राजस्व बढ़ेगा और कंपनियों के लिए टैक्स छुपाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

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