अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का 49 वर्ष की आयु में निधन
पटना: वेदांता रिसोर्सेज(Vedanta Group) के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का निधन हो गया है। वह अमेरिका में स्कीइंग के दौरान एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद उनका न्यूयॉर्क(New York) के माउंट सिनाई अस्पताल में इलाज चल रहा था। 7 जनवरी 2026 को इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जो जानलेवा साबित हुआ। अनिल अग्रवाल ने इस दुखद समाचार को साझा करते हुए इसे अपने जीवन का सबसे ‘अंधकारमय दिन’ बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है।
माइनिंग और गोल्ड रिफाइनरी क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान
अग्निवेश अग्रवाल केवल एक विरासत के वारिस ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने व्यावसायिक जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन के रूप में माइनिंग तकनीक को आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में फुजैराह गोल्ड रिफाइनरी(Vedanta Group) की स्थापना का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। वे हेल्थकेयर सेक्टर में एक सक्रिय निवेशक थे और उन्होंने वेदांता की कई महत्वपूर्ण कंपनियों में निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं।
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परोपकार का संकल्प: कमाई का 75% हिस्सा होगा दान
बेटे को खोने के गम के बीच अनिल अग्रवाल ने एक बड़ा मानवीय फैसला लिया है। उन्होंने अपने बेटे से किए गए वादे को पूरा करने के लिए अपनी निजी कमाई का 75% हिस्सा दान करने का संकल्प लिया है। अग्निवेश, जो पटना में जन्मे थे और प्रतिष्ठित मेयो(Vedanta Group) कॉलेज के छात्र रहे थे, अपने पिता की ‘स्क्रैप से साम्राज्य’ तक की विरासत को मॉडर्न मैनेजमेंट के जरिए आगे बढ़ा रहे थे। उनके निधन से उद्योग जगत ने एक दूरदर्शी युवा नेतृत्व खो दिया है।
अग्निवेश अग्रवाल के निधन का मुख्य कारण क्या था?
अग्निवेश अग्रवाल अमेरिका में स्कीइंग करते समय एक दुर्घटना में घायल हो गए थे। न्यूयॉर्क के अस्पताल में इलाज के दौरान, 7 जनवरी 2026 को उन्हें कार्डियक(Vedanta Group) अरेस्ट (दिल का दौरा) आया, जिसके कारण उनका निधन हो गया।
व्यावसायिक क्षेत्र में अग्निवेश अग्रवाल की प्रमुख उपलब्धियां क्या थीं?
उन्होंने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के चेयरमैन के रूप में माइनिंग सेक्टर को आधुनिक बनाया। साथ ही, उन्होंने यूएई (UAE) में ‘फुजैराह गोल्ड’ नामक बड़ी सोने और चांदी की रिफाइनरी स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
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