WhatsApp: वॉट्सएप प्राइवेसी विवाद

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मस्क और डुरोव के गंभीर आरोपों से मचा हड़कंप

नई दिल्ली: मेटा के स्वामित्व वाले वॉट्सएप(WhatsApp) की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया दिग्गज इलॉन मस्क और टेलीग्राम के फाउंडर पावेल डुरोव ने वॉट्सएप के ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ के दावे को चुनौती दी है। डुरोव ने इसे इतिहास(History) का सबसे बड़ा ‘एन्क्रिप्शन फ्रॉड’ करार दिया है। यह तीखी प्रतिक्रिया अमेरिका(America) में दायर एक क्लास एक्शन मुकदमे के बाद आई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वॉट्सएप न केवल यूजर्स के मैसेज को इंटरसेप्ट करता है, बल्कि उन्हें एक्सेंचर जैसी बाहरी कंपनियों के साथ साझा भी कर रहा है

प्रतिद्वंद्वियों की अपील और बाजार में खींचतान

इस विवाद के बीच इलॉन मस्क ने अपने प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) की चैट सर्विस को बढ़ावा देते हुए दावा किया कि वहां यूजर्स को ‘असली प्राइवेसी’ मिलती है। मस्क और मार्क जुकरबर्ग के बीच का यह मुकाबला काफी पुराना है, जो अब तकनीकी दावों से आगे बढ़कर कानूनी लड़ाइयों तक पहुँच गया है। याचिकाकर्ताओं ने कैलिफोर्निया के फेडरल कोर्ट में ज्यूरी ट्रायल की मांग की है, जिससे मेटा की पारदर्शिता पर गहरा संकट मंडरा रहा है। यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह डिजिटल प्राइवेसी के इतिहास की सबसे बड़ी विफलता हो सकती है।

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मेटा का बचाव और तकनीक का पक्ष

इन आरोपों को मेटा ने पूरी तरह से ‘झूठा और बेतुका’ बताया है। कंपनी का कहना है कि वे पिछले एक दशक से सुरक्षित ‘सिग्नल प्रोटोकॉल’ का उपयोग कर रहे हैं, जो यह सुनिश्चित करता है कि मैसेज केवल भेजने वाले और पाने वाले के बीच ही रहें। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के सिद्धांत के अनुसार, खुद कंपनी भी डेटा को डीकोड नहीं कर सकती। हालांकि, मुकदमे में उठाए गए सवाल अब आम यूजर्स के मन में सुरक्षा को लेकर संशय पैदा कर रहे हैं कि क्या उनका निजी डेटा वास्तव में सुरक्षित है या विज्ञापनों और डेटा माइनिंग के लिए उपयोग किया जा रहा है।

अमेरिका में वॉट्सएप के खिलाफ मुकदमा किन व्यक्तियों ने और कहाँ दायर किया है?

यह मुकदमा ब्रायन वाई. शीराजी और निदा सैमसन नामक दो यूजर्स ने इसी साल जनवरी में कैलिफोर्निया के फेडरल कोर्ट में दायर किया है।

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तकनीक का मुख्य कार्य क्या है?

यह तकनीक मैसेज को एक गुप्त कोड में बदल देती है, जिससे भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के अलावा कोई भी तीसरा पक्ष (यहाँ तक कि कंपनी खुद भी) उसे पढ़ या सुन नहीं सकता।

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Dhanarekha

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