Wholesale Inflation: थोक महंगाई में उछाल

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10 महीने के उच्चतम स्तर 1.81% पर पहुँचा आँकड़ा

नई दिल्ली: भारत की थोक महंगाई दर(Wholesale Inflation) जनवरी में बढ़कर 1.81% पर पहुँच गई है, जो पिछले 10 महीनों का सबसे ऊपरी स्तर है। दिसंबर में यह दर मात्र 0.83% थी। वाणिज्य मंत्रालय(Ministry of Commerce) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा की जरूरतों के सामान (प्राइमरी आर्टिकल्स) की कीमतों में तेजी आने की वजह से यह उछाल देखा गया है। इससे पहले मार्च 2025 में महंगाई दर 2.05% के स्तर पर थी

प्रमुख क्षेत्रों का असर: खाने-पीने की चीजें और मैन्युफैक्चरिंग

थोक बाजार में महंगाई(Wholesale Inflation) बढ़ने का मुख्य कारण ‘प्राइमरी आर्टिकल्स’ और ‘फूड इंडेक्स’ में आई तेजी है। रोजाना की जरूरत वाले सामानों(Goods)की महंगाई दर 0.21% से बढ़कर सिधे 2.21% हो गई है। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स, जिनका थोक सूचकांक में सबसे ज्यादा 64.23% वेटेज होता है, की महंगाई दर भी बढ़कर 2.86% रही। राहत की बात केवल ईंधन और पावर सेक्टर में रही, जहाँ थोक महंगाई दर में गिरावट दर्ज की गई।

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आम आदमी पर प्रभाव: थोक से खुदरा महंगाई का कनेक्शन

थोक महंगाई(Wholesale Inflation) का सीधा असर आम जनता पर तब पड़ता है जब उत्पादक बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं। जनवरी में खुदरा महंगाई भी 8 महीनों के उच्च स्तर 2.75% पर पहुँच गई है। जब कच्चे माल और थोक सामान की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो बाजार में मिलने वाले अंतिम उत्पाद भी महंगे हो जाते हैं। सरकार इसे नियंत्रित करने के लिए टैक्स और एक्साइज ड्यूटी में कटौती जैसे कदम उठाती है।

थोक महंगाई और खुदरा महंगाई में मुख्य अंतर क्या है?

इस महंगाई(Wholesale Inflation)उन कीमतों पर आधारित होती है जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से लेता है। वहीं, खुदरा महंगाई (CPI) वह दर है जो आम ग्राहक सामान खरीदते समय चुकाता है। WPI में मैन्युफैक्चरिंग सामान का वेटेज ज्यादा होता है, जबकि CPI में खाने-पीने की चीजों और सेवाओं का।

थोक महंगाई सूचकांक में किन वस्तुओं का भार सबसे अधिक है?

थोक महंगाई सूचकांक में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स (64.23%) की है। इसके बाद प्राइमरी आर्टिकल्स (22.62%) और फिर फ्यूल एंड पावर (13.15%) का स्थान आता है।

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Dhanarekha

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