सिंगल स्क्रीन थिएटरों की चिंता
Single Screen Theatres : तेलंगाना के एग्जिबिटर्स ने सिंगल स्क्रीन थिएटरों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने फिल्मी सितारों और निर्माताओं से प्रतिशत शेयरिंग मॉडल लागू करने की अपील की है। तेलंगाना एग्जिबिटर्स एसोसिएशन ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि मौजूदा समय में सिंगल स्क्रीन थिएटर भारी आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। कोविड के बाद हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और पुराना रेंटल मॉडल अब थिएटर मालिकों पर बोझ बन गया है। इसलिए पूर्ण प्रतिशत शेयरिंग व्यवस्था लागू करना जरूरी हो गया है।
‘पुष्पा’ फिल्म का दिया उदाहरण
एग्जिबिटर्स ने कहा कि ‘पुष्पा’ जैसी बड़ी फिल्मों को दूसरे राज्यों के सिंगल स्क्रीन थिएटरों में प्रतिशत शेयरिंग मॉडल पर रिलीज किया गया था। लेकिन तेलुगु राज्यों में यह सुविधा नहीं दी गई, जो असमानता है। उन्होंने बताया कि मल्टीप्लेक्स पहले से ही इस मॉडल का फायदा उठा रहे हैं। अगर यही व्यवस्था सिंगल स्क्रीन थिएटरों में भी लागू की जाए तो उनकी स्थिति बेहतर हो सकती है।
बदल रही है दर्शकों की पसंद
एग्जिबिटर्स के अनुसार दर्शकों की देखने की आदतें तेजी से बदल रही हैं। पहले ‘एफ-2’ जैसी फिल्में आठ सप्ताह तक थिएटरों में चलती थीं, लेकिन अब बड़े ब्लॉकबस्टर भी कम समय में ही थिएटरों से हट जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के कारण थिएटर कारोबार प्रभावित हो रहा है। आज दर्शक केवल खास फिल्मों के लिए ही सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं।
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जोखिम और मुनाफा बराबर बांटने की मांग
एग्जिबिटर्स ने कहा कि मौजूदा रेंटल सिस्टम में थिएटर मालिकों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसलिए (Single Screen Theatres) निर्माता, वितरक और थिएटर मालिकों के बीच जोखिम और मुनाफा समान रूप से बांटने वाली व्यवस्था जरूरी है। उनका मानना है कि प्रतिशत शेयरिंग मॉडल लागू होने से सिंगल स्क्रीन थिएटरों को राहत मिलेगी और फिल्म उद्योग भी बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकेगा।
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