हिन्दी पंचांग के तीसरे महीने ज्येष्ठ में मनाए जाएंगे शनि जंयती, गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रत-पर्व
महीना ज्येष्ठ
हिन्दी पंचांग का तीसरा महीना ज्येष्ठ शुरू हो गया है। इस महीने में पानी का महत्व समझाने वाले व्रत-पर्व खासतौर पर मनाए जाते हैं। जानिए इस महीने के खास तीज-त्योहार…
इस महीने को “ज्येष्ठ” इसलिए कहा गया क्योंकि इस समय सूर्य की प्रखरता और तेजी अपने चरम पर होती है. इसलिए सूर्य उपासना को इस माह में विशेष फलदायी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि यही वह महीना है जब श्रीराम और हनुमान जी की पहली भेंट हुई थी।
ज्येष्ठ माह का महत्व
- इस महीने को “ज्येष्ठ” इसलिए कहा गया क्योंकि इस समय सूर्य की प्रखरता और तेजी अपने चरम पर होती है. इसलिए सूर्य उपासना को इस माह में विशेष फलदायी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि यही वह महीना है जब श्रीराम और हनुमान जी की पहली भेंट हुई थी. इस माह में किया गया जल दान और तीर्थ यात्रा अत्यंत पुण्यकारी मानी जाती है. ज्येष्ठ माह में भगवान विष्णु, शनि देव और हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है।
वृष संक्रांति –
- बुधवार, 14 मई को सूर्य मेष से वृष राशि में प्रवेश करेगा। इसे वृष संक्रांति कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव की विशेष पूजा करनी चाहिए।
- गणेश चतुर्थी व्रत –
- शुक्रवार, 16 मई को ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी व्रत किया जाएगा। इस दिन भक्त भगवान गणेश के लिए व्रत करते हैं और विशेष पूजा करते हैं।
- अपरा एकादशी –
- शुक्रवार, 23 मई को ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी है, इसे अपरा और अचला एकादशी कहते हैं। इस तिथि पर भगवान विष्णु के लिए व्रत किया जाता है और भगवान का विशेष अभिषेक करते हैं।
- शनि जयंती –
- सोमवार, 26 मई और मंगलवार, 27 मई ज्येष्ठ मास की अमावस्या है। 26 को श्राद्ध की अमावस्या रहेगी। 27 मई को शनि जयंती मनाई जाएगी। इस दिन स्नान-दान की अमावस्या रहेगी। शनि जयंती पर सरसों के तेल का दान करना चाहिए।
- विनायकी चतुर्थी –
- शुक्रवार, 30 मई को ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी होने से इस दिन भगवान गणेश के लिए व्रत-उपवास किया जाएगा।
- गंगा दशहरा –
- गुरुवार, 5 जून को गंगा दशहरा है। मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी पर देवनदी गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इस वजह से इस पर्व को गंगा दशहरा कहा जाता है। इस दिन गंगा नदी में स्नान, दान और जप करना चाहिए।
- निर्जला एकादशी –
- शुक्रवार, 6 जून को सालभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य देने वाला निर्जला एकादशी व्रत है। इस व्रत में भक्त दिनभर अन्न और जल का त्याग करते हैं, पानी भी नहीं पीते है। इसी वजह से निर्जला एकादशी व्रत को एक तप के समान माना जाता है।
- ज्येष्ठ पूर्णिमा –
- मंगलवार, 10 जून और बुधवार, 11 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा है, ये महीने की अंतिम तिथि है। 10 तारीख को पूर्णिमा व्रत किया जाएगा और 11 को संत कबीर की जयंती मनाई जाएगी।