Religion : जानिए कब से शुरू हो रही जगन्नाथ रथ यात्रा

Author Icon By digital
Updated: June 3, 2025 • 1:56 PM
వాట్సాప్‌లో ఫాలో అవండి

27 जून से शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा

जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म का एक भव्य पर्व है, जो ओडिशा के पुरी में हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। यह उत्सव भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। यह यात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को शुरू होती है, जो जून या जुलाई में पड़ती है। इस वर्ष 2025 में जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून, शुक्रवार को शुरू होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 26 जून को दोपहर 1:24 बजे शुरू होगी और 27 जून को सुबह 11:19 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर यह पर्व 27 जून को मनाया जाएगा। यह यात्रा नौ दिनों तक चलती है और 5 जुलाई को समाप्त होगी। इस दौरान लाखों भक्त रथों को खींचते हैं और भगवान के दर्शन करते हैं, जो भक्ति और एकता का प्रतीक है।

एकता और समानता का भी प्रतीक है जगन्नाथ रथ यात्रा

जगन्नाथ रथ यात्रा का बहुत अधिक महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रथ यात्रा में शामिल होने या भगवान के दर्शन करने से भक्तों के सभी पापों का नाश होता है और उन्हें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह यात्रा एकता और समानता का भी प्रतीक है, क्योंकि इसमें हर वर्ग के लोग बिना किसी भेदभाव के भाग लेते हैं। पुरी का जगन्नाथ मंदिर चार धाम तीर्थों में से एक है, और यह यात्रा भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाने वाली मानी जाती है।

जानिए क्या है पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार सुभद्रा ने अपने भाइयों, जगन्नाथ और बलभद्र के साथ पुरी नगर देखने की इच्छा व्यक्त की। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान जगन्नाथ ने उन्हें रथ पर बैठाकर नगर भ्रमण कराया। इस दौरान वे अपनी मौसी के घर, गुंडीचा मंदिर, में सात दिनों तक रुके। तब से यह परंपरा हर साल मनाई जाती है। एक अन्य कथा के अनुसार, यह यात्रा भगवान कृष्ण की मथुरा यात्रा का प्रतीक है, जहां वे अपने भाई-बहन के साथ जाते हैं।

स्नान पूर्णिमा से होती है यात्रा की शुरूआत

जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत स्नान पूर्णिमा से होती है, जब भगवान को 108 घड़ों से स्नान कराया जाता है। इसके बाद वे 15 दिनों के लिए एकांतवास में रहते हैं। मुख्य यात्रा के दिन तीनों देवताओं को विशाल रथों पर बिठाया जाता है। जगन्नाथ का रथ ‘नंदीघोष’ 16 पहियों वाला, बलभद्र का रथ ‘तालध्वज’ 14 पहियों वाला और सुभद्रा का रथ ‘दर्पदलन’ 12 पहियों वाला होता है। लाखों भक्त इन रथों को खींचते हैं और गुंडीचा मंदिर तक ले जाते हैं। इस दौरान पुरी की सड़कों पर भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिलता है।

गुंडीचा मंदिर अपने पति से मिलने जाती हैं माता लक्ष्मी

पांचवें दिन हेरा पंचमी पर माता लक्ष्मी अपने पति जगन्नाथ से मिलने गुंडीचा मंदिर जाती हैं। नौवें दिन, बहुदा यात्रा के दौरान देवता वापस जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। इस यात्रा में चेरा पाहरा अनुष्ठान भी होता है, जिसमें पुरी के राजा रथों की सफाई करते हैं, जो समानता का संदेश देता है। यह पर्व भक्ति, एकता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुपम संगम है।

# Paper Hindi News #Breaking News in Hindi #Google News in Hindi #Hindi News Paper breakingnews Jagannath Rath Yatra latestnews trendingnews जगन्नाथ रथ यात्रा

గమనిక: ఈ వెబ్ సైట్ లో ప్రచురించబడిన వార్తలు పాఠకుల సమాచార ప్రయోజనాల కోసం ఉద్దేశించి మాత్రమే ఇస్తున్నాం. మావంతుగా యధార్థమైన సమాచారాన్ని ఇచ్చేందుకు కృషి చేస్తాము.