अष्टमी का विशेष दिन
अष्टमी का दिन नवरात्रि का आठवां दिन होता है और इसे कन्या पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
Ashtami Kanya Pujan Rules: नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की उपासना करते हैं. मान्यता है कि अष्टमी ( Ashtami ) के दिन विधि-विधान से पूजन करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और जातक को सौभाग्य की प्राप्ति होती है.अगर आप भी इस दिन कन्या पूजन कर मां का आशीर्वाद लेना चाहते हैं, तो यहां जानें शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम।
Navratri Maha Ashtami 2026: चैत्र नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. इनमें महाष्टमी का दिन विशेष महत्व रखता है, जो मां महागौरी (maan mahaagauree) को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और कन्या पूजन करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. साल 2026 में दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी. इस दिन कन्या पूजन के लिए कुछ खास शुभ मुहूर्त बताए गए हैं, जिनमें पूजा करने से अधिक फल मिलता है।
अष्टमी या नवमी कब करें कन्या पूजन?
अक्सर लोगों के मन में संशय रहता है कि कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को. शास्त्रों के अनुसार, दोनों ही दिन कन्या पूजन करना बेहद शुभ फलदायी होता है. जो लोग अष्टमी का व्रत रखते हैं, वे इस दिन पूजन करते हैं, वहीं कुछ लोग नवमी तिथि पर व्रत का पारण और कन्या पूजन करना श्रेष्ठ मानते हैं. आप अपनी कुल परंपरा या सुविधा के अनुसार दोनों में से किसी भी दिन पूजन कर सकते हैं।
अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, अष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए ये तीन शुभ समय रहेंगे. इन तीनों मुहूर्तों में से किसी में भी कन्या पूजन करना शुभ माना गया है.
- पहला मुहूर्त: सुबह 6:16 बजे से 7:48 बजे तक रहेगा.
- दूसरा मुहूर्त: सुबह 10:56 बजे से दोपहर 2:01 बजे तक रहेगा.
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा.
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अष्टमी पर कन्या पूजन के नियम
उम्र का ध्यान: पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष तक की आयु की कन्याओं को आमंत्रित करना सबसे उत्तम माना जाता है।
कन्याओं की संख्या: शास्त्रों के अनुसार 9 कन्याओं का पूजन अनिवार्य है. यदि किसी कारणवश 9 कन्याएं न मिलें, तो आप अपनी श्रद्धा के अनुसार 2, 5 या 7 कन्याओं का पूजन भी कर सकते हैं.
बटुक भैरव का महत्व: कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी आमंत्रित करना आवश्यक है. उस बालक को बटुक भैरव या लांगुरा का रूप माना जाता है. उनके बिना देवी की पूजा अधूरी मानी जाती है.
अष्टमी पर कन्या पूजन विधि
- कन्याओं के घर आने पर सबसे पहले उनके पैर धोएं और उन्हें साफ आसन पर बिठाएं.
- सभी कन्याओं के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं.
- हाथ में कलावा (रक्षासूत्र) बांधें.
- मां के प्रसाद स्वरूप पूरी, काले चने और हलवे का भोजन श्रद्धापूर्वक कराएं.
- भोजन के बाद सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा, फल या उपहार दें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें.
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