FD Rate में कटौती, HDFC और ICICI Bank का फैसला

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FD Rate में कटौती, HDFC और ICICI Bank का फैसला
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FD Rate में कटौती, HDFC और ICICI Bank का फैसला

जो लोग Fixed Deposit (FD Rate) में निवेश कर सुरक्षित और निश्चित रिटर्न की योजना बना रहे थे, उनके लिए एक झटका है। देश के दो बड़े निजी बैंक—HDFC Bank और ICICI Bank—ने चुनिंदा अवधियों वाली एफडी पर ब्याज दरों में कटौती का ऐलान किया है। नई दरें 10 जून 2025 से प्रभावी हो गई हैं।

किन अवधियों पर घटाई गई FD दरें?

दोनों बैंकों ने सभी अवधियों पर कटौती नहीं की है, बल्कि कुछ विशेष टेन्योर (Selected Tenures) पर ब्याज दरें घटाई हैं।

HDFC Bank:

  • 18 महीने से 21 महीने की अवधि पर दर घटकर 7.00% से 6.75% हुई
  • Senior Citizens को अब 7.50% से घटाकर 7.25% दिया जाएगा
FD Rate में कटौती, HDFC और ICICI Bank का फैसला
FD Rate में कटौती, HDFC और ICICI Bank का फैसला

ICICI Bank:

  • 15 महीने से 18 महीने की FD पर दर 7.10% से 6.80%
  • सीनियर सिटिज़न को भी इसी अवधि पर 0.25% कम ब्याज मिलेगा

FD Rate कटौती के कारण क्या हैं?

बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, इन बदलावों के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • बाजार में तरलता (Liquidity) की अधिकता
  • क्रेडिट डिमांड में कमी
  • RBI द्वारा पॉलिसी दरों में बदलाव न करना
  • लंबी अवधि की निधियों की आवश्यकता में गिरावट

FD Rate में यह कटौती मौजूदा आर्थिक स्थिति का संकेत देती है, जहां बैंक अपने डिपॉजिट और लोन रेट्स को संतुलित कर रहे हैं।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

  • जो निवेशक 10 जून से पहले FD करा चुके हैं, उन्हें पुरानी दरें मिलती रहेंगी
  • 10 जून के बाद नई FD पर कम रिटर्न मिलेगा
  • Senior Citizens को भी दरों में कटौती का सामना करना पड़ेगा
  • Recurring Deposits (RD) पर भी संभावित प्रभाव
FD Rate में कटौती, HDFC और ICICI Bank का फैसला
FD Rate में कटौती, HDFC और ICICI Bank का फैसला

FD के विकल्प क्या हो सकते हैं?

अगर आप अब भी अच्छा रिटर्न चाहते हैं, तो इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं:

  • Debt Mutual Funds (कम जोखिम)
  • Government Bonds
  • Post Office Time Deposit
  • Corporate FD (ज़्यादा रिटर्न, थोड़ा रिस्क)
  • Sovereign Gold Bonds (SGB)

HDFC Bank और ICICI Bank द्वारा की गई FD Rate में कटौती से निवेशकों को थोड़ा झटका ज़रूर लगेगा, खासकर ऐसे समय में जब महंगाई दर ऊंचाई पर है। हालांकि, समझदारी इसी में है कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित करें और वैकल्पिक निवेश विकल्पों पर ध्यान दें।

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लेखक परिचय

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