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सिविल विवादों को आपराधिक मामलों में बदला जाना हास्यास्पद

Author Icon By digital@vaartha.com
Updated: April 7, 2025 • 4:12 PM
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भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने सोमवार (7 अप्रैल 2025) को कहा कि उत्तर प्रदेश में साधारण सिविल विवादों को रोज़ाना आपराधिक मामलों में बदला जा रहा है, जो राज्य में कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने इसे “बिल्कुल हास्यास्पद” करार दिया।

सिविल मुकदमों को आपराधिक मामलों में बदल दिया जा रहा है

मुख्य न्यायाधीश खन्ना, जो न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन के साथ तीन-न्यायाधीशों की पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे, ने कहा —
“हर दिन, सिविल मुकदमों को आपराधिक मामलों में बदल दिया जाता है। यह हास्यास्पद है। सिविल विवादों को आपराधिक अपराधों में नहीं बदला जा सकता। उत्तर प्रदेश में कानून का राज पूरी तरह से चरमरा गया है। सिविल मामले को आपराधिक केस में बदलना स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट दो लोगों, देबू सिंह और दीपक सिंह, की अपील पर सुनवाई कर रही थी। इन दोनों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

चेक बाउंस मामले पर विवाद

ये दोनों व्यक्ति पहले चेक बाउंस के केस का सामना कर रहे थे, लेकिन अचानक उन पर भरोसे का उल्लंघन, डराना-धमकाना और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आपराधिक आरोप लगा दिए गए। इनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सिविल मामलों में फैसला आने में समय लगता है, इसलिए जल्द नतीजा पाने के लिए जानबूझकर आपराधिक केस दर्ज कर दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दोनों व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी, लेकिन चेक बाउंस के मामले की सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिस पुलिस अधिकारी ने यह जांच की है, उसे अदालत में गवाही के लिए बुलाया जाना चाहिए, ताकि वह समझाए कि चेक बाउंस जैसे सिविल मामले को आपराधिक केस में क्यों बदला गया।

उन्होंने कहा,जांच अधिकारी को गवाही के लिए खड़ा किया जाए और वह बताए कि इस मामले में अपराध कैसे बनता है। उसे भी सबक मिलेगा। ऐसे चार्जशीट दायर नहीं की जातीं। यह अजीब है कि उत्तर प्रदेश में यह हर दिन हो रहा है। वकील तो जैसे भूल ही गए हैं कि सिविल अदालत भी होती है।”

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और जांच अधिकारी को दो सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है, जिसमें उन्हें बताना होगा कि उन्होंने सिविल विवाद में आपराधिक कार्रवाई क्यों शुरू की।

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