Handloom : सरकार ने हैंडलूम कर्ज माफी के लिए 16.27 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की

By Ajay Kumar Shukla | Updated: January 15, 2026 • 8:57 AM

हैदराबाद। कृषि, हैंडलूम और वस्त्र मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के निर्देशानुसार हैंडलूम (Handloom) बुनकरों के कर्ज माफी कार्यक्रम के लिए अतिरिक्त 16.27 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी गई है। यह राशि उन बुनकरों (weavers) के लिए है, जिनके व्यक्तिगत कर्ज की राशि 1 लाख रुपये तक है। मंत्री ने बताया कि इससे पहले संबंधित जिलों में 33 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, ताकि बुनकरों के खातों में सीधे जमा किया जा सके। अप्रैल 2017 से मार्च 2024 के बीच लिए गए 1 लाख रुपये तक के व्यक्तिगत कर्ज इस माफी के दायरे में आएंगे, जिनसे कुल 6,784 बुनकर लाभान्वित होंगे।

लगभग 960 करोड़ रुपये किए जा चुके हैं आवंटित

तुम्मला नागेश्वर राव ने यह भी बताया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अब तक हैंडलूम बुनकरों के कल्याण के लिए लगभग 960 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं। बुनकरों के सतत रोजगार सुनिश्चित करने के लिए मंत्री ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे वस्त्र खरीद केवल टेस्को से करें। इसके तहत विभिन्न विभागों ने अब तक 896 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए हैं। इसके अलावा, 30,000 पावर लूम के निरंतर कार्य के लिए इंदिरा महिला शक्ति साड़ी योजना शुरू की गई है। मंत्री ने बताया कि हैंडलूम अभयस्थम योजना के लिए 150 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।

खातों में ट्रांसफर कर दिए गए

पूर्व सरकार द्वारा बुनकरों को बकाया 290 करोड़ रुपये अब नेथन्ना चेयुथा योजना के तहत उनके खातों में ट्रांसफर कर दिए गए हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकारी विभाग हैंडलूम सहकारी समितियों से वस्त्र खरीदेंगे और इनके लिए प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाएंगी तथा कार्यशील पूंजी के लिए मदद भी दी जाएगी। इस वर्ष 78 सहकारी समितियों को जिला सहकारी बैंकों के माध्यम से 19 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी की स्वीकृति दी गई है।

हैंडलूम क्या होता है?

परंपरागत हथकरघा विधि से कपड़ा बुनने की प्रक्रिया को यह कहा जाता है। इसमें बिजली या मशीन की जगह हाथों और पैरों से चलने वाले करघे का उपयोग होता है, जिससे साड़ी, दुपट्टा और वस्त्र तैयार किए जाते हैं और पारंपरिक कारीगरी को बढ़ावा मिलता है।

हैंडलूम में क्या-क्या आता है?

इस श्रेणी में हथकरघा साड़ियां, शॉल, दुपट्टे, बेडशीट, तौलिये, अंगवस्त्र और सूती-रेशमी कपड़े शामिल होते हैं। अलग-अलग राज्यों की विशिष्ट बुनाई शैलियां भी इसमें आती हैं, जो स्थानीय संस्कृति और कारीगरों की पहचान को दर्शाती हैं।

हथकरघा योजना क्या है?

सरकार द्वारा चलाई जाने वाली यह योजना बुनकरों के कल्याण और रोजगार सृजन के लिए बनाई गई है। इसके अंतर्गत वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, आधुनिक डिजाइन, कच्चा माल और विपणन सुविधा दी जाती है, ताकि पारंपरिक हथकरघा उद्योग को मजबूती मिल सके।

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