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Crop-residues : फसल अवशेष न जलाएं, वैज्ञानिक तरीके अपनाएं

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 25, 2026 • 10:25 PM
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Crop-residues : हैदराबाद। तेलंगाना कृषि विभाग ने किसानों से फसल अवशेषों (Crop residues) को जलाने से बचने और वैज्ञानिक तरीकों से खेतों को तैयार करने की अपील की है। विभाग ने चेतावनी दी है कि फसल अवशेष जलाने से भूमि की उर्वरता कम होने के साथ-साथ पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं। कृषि विभाग के निदेशक डॉ. बी. गोपी, आईएएस ने बताया कि इस यासंगी सीजन में राज्य में रिकॉर्ड स्तर पर धान की खेती हुई और अब अधिकांश क्षेत्रों में कटाई पूरी हो चुकी है। आगामी खरीफ (Kharif season) (वर्षाकालीन) फसलों की बुवाई के लिए किसान खेत तैयार कर रहे हैं। इस दौरान कई किसान फसल अवशेष हटाने के लिए उन्हें जलाने का आसान तरीका अपना रहे हैं।

कृषि विभाग की किसानों से अपील

उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी में मौजूद जैविक कार्बन नष्ट हो जाता है। साथ ही नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी भारी क्षति होती है। इससे भूमि की उर्वरता घटती है और भविष्य में किसानों को अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर होना पड़ता है। कृषि विभाग ने बताया कि फसल अवशेषों के दहन से वायु प्रदूषण बढ़ता है और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। गर्मी के मौसम में आग तेजी से फैलने का खतरा रहता है, जिससे जान-माल की हानि हो सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण के तहत खुले में कचरा या फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

उल्लंघन करने वालों पर लगाया जाएगा पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क

पर्यावरण, वन एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग के जीओ एमएस नंबर-27 के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया जाएगा। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल अवशेषों को खेत में मिलाकर जैविक कार्बन बढ़ाएं, जिससे मिट्टी की उर्वरता सुधरेगी, रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम होगा और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहेगी। डॉ. बी. गोपी ने बताया कि विभाग द्वारा गांव स्तर पर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ किसान अभी भी फसल अवशेष जला रहे हैं। हाल ही में भूपालपल्ली जिले में चागर्ला चंद्रमौली और भाग्यम्मा नामक किसानों की फसल अवशेष जलाने के दौरान दुर्घटनावश मृत्यु हो गई, जो अत्यंत दुखद घटना है।

अधीनस्थ कर्मचारियों को जारी किए गए मेमो

डॉ. बी. गोपी, आईएएस, निदेशक, कृषि विभाग, तेलंगाना ने कहा कि इस घटना के बाद संबंधित जिला कृषि अधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारियों को मेमो जारी किए गए हैं तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए किसानों में और अधिक जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेष न जलाएं और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर भूमि की उर्वरता एवं पर्यावरण की रक्षा करें।

तेलंगाना में सबसे ज्यादा खेती किसकी होती है?

धान, कपास, मक्का और लाल चना तेलंगाना की प्रमुख फसलें हैं। इन फसलों के अंतर्गत कुल कृषि क्षेत्र का लगभग 85% हिस्सा आता है। वर्तमान में धान 50% और कपास 28% क्षेत्र पर उगाई जाती है, यानी ये दोनों मिलकर 78% खेती को कवर करती हैं। तेलंगाना धान का सबसे बड़ा और कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

तेलंगाना में किसानों के लिए नई योजना क्या है?

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मार्च 2026 में ‘रायथु भरोसा’ योजना के तहत ₹9,000 करोड़ रुपये 45 दिनों के भीतर तीन किस्तों में किसानों के खातों में ट्रांसफर करने की घोषणा की। इस योजना के तहत किसानों को ₹15,000 वार्षिक सब्सिडी दी जाती है। इसके साथ ही 2 लाख रुपये तक के फसल ऋण माफ किए गए, जिससे 25.35 लाख किसानों को लाभ मिला।

तेलंगाना राज्य में प्रति माह एक कृषि अधिकारी का वेतन कितना है?

TSPSC के तहत कृषि अधिकारी का वेतन ₹51,320 से ₹1,27,310 प्रति माह के बीच होता है। कृषि विस्तार अधिकारी (AEO) का प्रोबेशन काल में मासिक इन-हैंड वेतन ₹44,000 से ₹50,000 के बीच रहता है। सीनियर या पर्यवेक्षी स्तर पर मूल मासिक वेतन ₹35,000 से ₹1,04,000 तक पहुंच सकता है।

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