कालेश्वरम आयोग नहीं, कांग्रेस आयोग?
हैदराबाद । तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष और बीआरएस एमएलसी के कविता ने घोषणा की कि कांग्रेस सरकार ने कालेश्वरम परियोजना पर न्यायमूर्ति पीसी घोष आयोग का गठन केवल पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने और पिछली बीआरएस सरकार को बदनाम करने के लिए किया है।
उन्होंने चंद्रशेखर राव को आयोग द्वारा जारी किए गए नोटिस का विरोध करते हुए तेलंगाना जागृति द्वारा विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा, ‘यह कालेश्वरम आयोग नहीं है, बल्कि कांग्रेस आयोग है क्योंकि जांच जवाबदेही के बारे में नहीं, बल्कि राजनीतिक बदनामी के बारे में है। केसीआर ने क्या गलत किया? अगर आप उन्हें नोटिस जारी करते हैं, तो यह तेलंगाना की पूरी जनता को नोटिस जारी करने जैसा है।’
एक परिवर्तनकारी प्रयास है केएलआईपी : कविता
धरना चौक पर “जय तेलंगाना” और “जय केसीआर” के नारों के बीच सभा को संबोधित करते हुए कविता ने याद दिलाया कि कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) एक परिवर्तनकारी प्रयास है, जिसने राज्य भर में लाखों एकड़ जमीन को पानी पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि कालेश्वरम केवल तीन बैराज नहीं है, क्योंकि इसमें 21 पंप हाउस, 15 जलाशय, 200 किलोमीटर सुरंग और 1,500 किलोमीटर नहर शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘यह केसीआर की दूरदृष्टि ही थी, जिसने गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देते हुए 90 मीटर से 600 मीटर की ऊंचाई तक पानी उठाने, हैदराबाद को 40 टीएमसी और उद्योगों को 16 टीएमसी पानी उपलब्ध कराने के अलावा लगभग 40 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई करना संभव बनाया।’
रेवंत रेड्डी की चुप्पी पर उठाया सवाल
तेलंगाना जागृति अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि कांग्रेस सरकार ने मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) के कृष्ण रेड्डी को क्यों नहीं बुलाया, जिन्होंने परियोजना में 15 पंप हाउस बनाए हैं। उन्होंने बताया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन आंध्र प्रदेश में जला यज्ञम योजना के तहत सिंचाई परियोजना के अधिकांश काम एमईआईएल को दिए थे। उन्होंने मेडिगड्डा बैराज की मरम्मत की उपेक्षा करने और किसानों को पानी से वंचित करने के लिए रेवंत रेड्डी सरकार की आलोचना की, जबकि दूसरों को दोषी ठहराया। बीआरएस एमएलसी ने आंध्र प्रदेश की बनकाचेरला परियोजना और गोदावरी-पेन्ना नदियों को जोड़ने के मामले में रेवंत रेड्डी की चुप्पी पर सवाल उठाया।
तेलंगाना को भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र से कुछ नहीं मिलता : कविता
उन्होंने पूछा, ‘जब तेलंगाना का पानी डायवर्ट किया जा रहा है, तो मुख्यमंत्री की ओर से कोई विरोध क्यों नहीं किया जा रहा है? उन्होंने इसे रोकने के लिए केंद्र के समक्ष मुद्दा क्यों नहीं उठाया?’ कविता ने भाजपा की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि कम से कम सांसद ईटेला राजेंद्र, जिनकी जड़ें तेलंगाना राज्य आंदोलन से जुड़ी हैं, आंध्र प्रदेश की अवैध परियोजनाओं के खिलाफ आवाज उठाएं और तेलंगाना सिंचाई परियोजनाओं को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने की पैरवी करें।
उन्होंने कहा, ‘8 सांसद और 8 विधायक होने के बावजूद तेलंगाना को भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र से कुछ नहीं मिलता।’ उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस सरकार हैदराबाद में धरना देने से रोकने के लिए बाधाएँ खड़ी करती है, तो वे हर गली और जिले में फैल जाएँगे। उन्होंने घोषणा की, ‘तेलंगाना जागृति तब तक नहीं रुकेगी जब तक हम गोदावरी नदी से अपना हक का 1,000 टीएमसी हासिल नहीं कर लेते।’ उन्होंने पुलिस द्वारा मंचेरियल और रामगुंडम से तेलंगाना जागृति के कई सदस्यों को हिरासत में लेने की निंदा की, ताकि उन्हें धरने में भाग लेने से रोका जा सके।
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