हैदराबाद। तेलंगाना भाजपा (BJP) राज्य कार्यालय में भगीरथ महर्षि जयंती का आयोजन बड़े धूमधाम से किया गया। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भगीरथ महार्षि के चित्र पर माल्यार्पण कर विशेष पूजा-अर्चना की। रामचंदर राव ने सागर (मछुआरा) समाज सहित राज्य के सभी लोगों को जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस दिवस को उत्सव के रूप में मनाना समाज के परिश्रम, नैतिक मूल्यों और निर्माण में उनके योगदान का सम्मान है। इस दौरान उन्होंने राज्य में जारी आरटीसी कर्मचारियों (RTC Employees) की हड़ताल पर चिंता जताई।
कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिलना निराशाजनक
उन्होंने कहा कि 41 दिन का नोटिस दिए जाने के बावजूद कांग्रेस सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिलना निराशाजनक है। उन्होंने सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि कर्मचारियों की मांगों के प्रति जिद्दी रुख अपनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरटीसी हड़ताल को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पूर्व बीआरएस सरकार की गलतियों को दोहरा रही है और चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल जेएसी नेताओं को वार्ता के लिए आमंत्रित करे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कार्यक्रम में सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी, पार्टी के वरिष्ठ नेता, सागर समाज के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
भगीरथ का जीवन परिचय क्या है?
राजा भगीरथ प्राचीन भारतीय परंपरा के एक महान और प्रसिद्ध राजा माने जाते हैं। वे इक्ष्वाकु वंश के राजा थे और अपनी कठोर तपस्या के लिए प्रसिद्ध हैं। कहा जाता है कि उन्होंने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए मां गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने का संकल्प लिया। उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर गंगा धरती पर अवतरित हुईं। इसलिए उन्हें दृढ़ संकल्प और परिश्रम का प्रतीक माना जाता है।
भगीरथ जयंती कब थी?
राजा भगीरथ की जयंती अलग-अलग स्थानों पर परंपरा और मान्यता के अनुसार मनाई जाती है। कई लोग इसे गंगा दशहरा या ज्येष्ठ माह से जोड़ते हैं, क्योंकि गंगा अवतरण की कथा उनसे संबंधित मानी जाती है। कुछ धार्मिक संस्थाएं विशेष तिथि पर भगीरथ जयंती का आयोजन करती हैं। यह तिथि हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदल सकती है, इसलिए सही जानकारी के लिए उस वर्ष का पंचांग देखा जाता है।
राजा भगीरथ की कहानी क्या है?
कथा के अनुसार राजा सगर के साठ हजार पुत्रों का श्रापवश विनाश हो गया था और उनकी आत्माओं की मुक्ति के लिए गंगा जल आवश्यक था। राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हुईं। भगवान शिव ने गंगा के वेग को अपनी जटाओं में धारण किया, तब गंगा धरती पर आईं। इसी कारण गंगा को भागीरथी भी कहा जाता है।
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