हैदराबाद। उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क (Deputy Chief Minister Bhatti Vikramarka) ने कहा कि तेलंगाना सरकार सौर ऊर्जा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए बहुआयामी रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र के साथ-साथ घरेलू उपभोग के लिए भी हरित ऊर्जा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योजनाएं तैयार की गई हैं। भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि केंद्र सरकार (Central government) द्वारा लगभग दस वर्ष पहले शुरू की गई पीएम-कुसुम योजना को पिछली बीआरएस सरकार की लापरवाही के कारण तेलंगाना में लागू नहीं किया गया, क्योंकि आवश्यक प्रस्ताव ही नहीं भेजे गए। उन्होंने कहा कि केंद्र अब यह स्पष्ट कर रहा है कि योजना पहले घोषित जरूर की गई थी, लेकिन उस समय राज्य ने इसका उपयोग नहीं किया और वर्तमान में इसके लिए धन उपलब्ध नहीं है।
अधिकतम कनेक्शन प्राप्त करने के लिए लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पीएम-कुसुम के अंतर्गत अधिकतम कनेक्शन प्राप्त करने के लिए लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और उन्होंने स्वयं केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से मुलाकात कर लिखित अनुरोध भी सौंपा है तथा अन्य राज्यों के अप्रयुक्त कोटे को तेलंगाना को देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि चूंकि तेलंगाना में मुफ्त बिजली दी जा रही है, इसलिए किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने हेतु केंद्र से कुछ दिशानिर्देशों में संशोधन का अनुरोध किया गया है। कृषि क्षेत्र में सौर क्रांति लाने के लिए स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं को समूह बनाकर सौर परियोजनाएं स्थापित करने और किसानों की भूमि लीज पर लेने की अनुमति दी गई है।
शर्त में ढील देने का अनुरोध
भट्टी विक्रमार्क ने बताया कि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएम-कुसुम योजना केवल अपनी भूमि पर खेती करने वाले किसानों पर लागू होती है, लीज पर खेती करने वालों पर नहीं। राज्य सरकार ने इस शर्त में ढील देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों का अंश स्वयं वहन करने को तैयार है और केंद्र से पीएम-कुसुम कनेक्शन स्वीकृत करने की अपील की गई है। किसानों को पहले से ही गुणवत्तापूर्ण मुफ्त बिजली मिलने के कारण फिलहाल सौर कृषि कनेक्शन में रुचि कम है, जिसे बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
पीएम कुसुम योजना कब शुरू हुई थी?
यह योजना किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 में शुरू की गई थी। इसका पूरा नाम प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान है। योजना का लक्ष्य कृषि क्षेत्र में डीजल पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत सोलर पंप, ग्रिड से जुड़े सोलर प्लांट और बंजर भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की सुविधा दी जाती है। यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से पूरे देश में लागू की जा रही है।
PM कुसुम योजना में कितना खर्चा आता है?
इस योजना के अंतर्गत कुल लागत का बड़ा हिस्सा सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दिया जाता है। सामान्य रूप से सोलर पंप या सोलर प्लांट की लागत का लगभग 60 प्रतिशत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं। करीब 30 प्रतिशत राशि बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। किसान को केवल लगभग 10 प्रतिशत खर्च स्वयं करना पड़ता है। वास्तविक लागत पंप की क्षमता और सोलर सिस्टम के आकार पर निर्भर करती है, इसलिए अलग-अलग मामलों में खर्च में थोड़ा अंतर हो सकता है।
पीएम सोलर स्कीम के लिए कौन पात्र है?
इस योजना का लाभ लेने के लिए देश का कोई भी पात्र किसान आवेदन कर सकता है। ऐसे किसान जिनके पास कृषि योग्य भूमि है या जो सिंचाई के लिए डीजल पंप का उपयोग करते हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा किसान समूह, सहकारी समितियां और पंचायतें भी पात्र मानी जाती हैं। आवेदक का बैंक खाता, भूमि से जुड़े दस्तावेज और पहचान पत्र होना आवश्यक होता है। पात्रता शर्तें राज्य सरकारों के अनुसार कुछ हद तक अलग हो सकती हैं, लेकिन मूल उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है।
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