Politics : पूर्व मंत्री हरीश राव ने की सीएम की आलोचना, कही बड़ी बात

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हरीश राव
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ग्रामीण स्थानीय निकायों को सीएम ने बनाया कमजोर : हरीश राव

हैदराबाद। पूर्व मंत्री और बीआरएस के वरिष्ठ विधायक टी हरीश राव ने मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी पर तीखा हमला करते हुए उन पर तेलंगाना में ग्रामीण स्थानीय निकायों को बुनियादी निधि से वंचित करके उन्हें कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने ग्रामीण शासन को बहाल करने के लिए तत्काल धन जारी करने की मांग की। उन्होंने पूछा, ‘क्या यही वह बदलाव है जिसका आपने वादा किया था, रेवंत रेड्डी?’ उन्होंने सवाल किया कि लगभग 18 महीने तक बिना धन प्राप्त किए ग्राम पंचायतें लोगों की सेवा कैसे कर सकती हैं।

केसीआर ने तेलंगाना को बनाया था राष्ट्रीय मॉडल : हरीश राव

हरीश राव ने एक बयान में कहा कि पिछली के चंद्रशेखर राव की अगुवाई वाली सरकार ने पंचायतों की संख्या बढ़ाकर 12,941 करके और प्रत्येक को ट्रैक्टर, टैंकर और ट्रॉली से लैस करके तेलंगाना को राष्ट्रीय मॉडल बना दिया था। हालांकि, कांग्रेस के शासन में पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई, उन्होंने दावा किया। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टरों के लिए डीजल खरीदने के लिए धन की कमी के कारण अधिकारियों को कचरा संग्रहण रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा।

फंड जारी करने में अक्षमता के कारण नहीं एकत्र किया जा रहा कचरा : हरीश राव

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस सरकार द्वारा फंड जारी करने में अक्षमता के कारण कचरा एकत्र नहीं किया जा रहा है, सफाई व्यवस्था ध्वस्त हो गई है और यहां तक ​​कि बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को भी नहीं बदला जा रहा है।’ उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत कर्मचारियों को हर महीने की पहली तारीख को वेतन देने का वादा किया गया था, लेकिन पिछले दो महीनों से उन्हें वेतन नहीं दिया गया है, जिसके कारण उन्हें विरोध प्रदर्शन करने और सामूहिक छुट्टी पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

हरीश राव

हर महीने 275 करोड़ रुपये जारी करती थी केसीआर सरकार

पूर्व मंत्री ने कहा कि पिछली बीआरएस सरकार ग्राम पंचायतों को हर महीने 275 करोड़ रुपये जारी करती थी, जो सालाना 3,300 करोड़ रुपये होता है, साथ ही शहरी स्वच्छता के लिए 1,700 करोड़ रुपये जारी करती थी। इसके विपरीत, मौजूदा कांग्रेस सरकार ने कोई फंड जारी नहीं किया और पल्ले प्रगति और पट्टना प्रगति जैसे बुनियादी स्वच्छता अभियान भी चलाने में विफल रही। उन्होंने कहा, ‘रेवंत रेड्डी अपने नए कैबिनेट सहयोगियों को विभाग आवंटित करने के लिए दिल्ली में तीन दिन बिता रहे हैं, जबकि गांवों की पूरी तरह उपेक्षा की जा रही है।’

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लेखक परिचय

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