Savitribai : प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले एक आंदोलन थी – मंत्री पोन्नम

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सावित्रीबाई फूले
सावित्रीबाई फूले
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हैदराबाद । देश की प्रथम महिला शिक्षिका (Teacher) सामाजिक क्रांतिकारिणी और स्त्री शिक्षा की पथप्रदर्शक महान विभूति सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर परिवहन एवं बीसी कल्याण विभाग के मंत्री (Minister) पोन्नम प्रभाकर ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

बालिकाओं के लिए विद्यालयों की स्थापना की

उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक आंदोलन थीं। जिस दौर में महिलाओं की शिक्षा को अनावश्यक मानने वाली अंधविश्वासी धारणाएँ प्रचलित थीं, उस समय उन्होंने अनेक अपमानों और बाधाओं का सामना करते हुए भी साहस के साथ आगे बढ़कर कार्य किया। शिक्षा को ही अपना अस्त्र मानते हुए उन्होंने बालिकाओं के लिए विद्यालयों की स्थापना की और समाज में समानता की मजबूत नींव रखी

सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन से सिद्ध कर दिखाया

उन्होंने यह भी कहा कि ‘शिक्षा के बिना मुक्ति नहीं’ इस संदेश को सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन से सिद्ध कर दिखाया। उनके दिखाए मार्ग पर चलने का अर्थ है। हर बालिका को शिक्षा, हर महिला को सम्मान और हर नागरिक को समान अवसर प्रदान करना। आज हमारा राज्य यदि शिक्षा, सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो उसके पीछे सावित्रीबाई फूले जैसी महान विभूतियों के विचारों की ही प्रेरणा है।

बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार

उन्होंने कहा कि सरकार के रूप में हम भी उनके आदर्शों के अनुरूप शिक्षा को सभी तक पहुँचाने, विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आइए, हम सभी सावित्रीबाई फुले के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें और शिक्षा के माध्यम से समाज को बदलने की जिम्मेदारी हम सब मिलकर निभाएँ।

सावित्री बाई फुले की कहानी क्या है?

भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक और नारी शिक्षा की अग्रदूत थीं। 19वीं शताब्दी में जब लड़कियों को पढ़ाना पाप माना जाता था, तब उन्होंने महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर बालिकाओं और दलितों की शिक्षा के लिए संघर्ष किया। समाज के विरोध, अपमान और कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला। वे विधवा पुनर्विवाह, बाल विवाह विरोध और जाति-भेद उन्मूलन की प्रबल समर्थक थीं। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम मानते हुए उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा में समर्पित कर दिया।

Savitribai Phule का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को नायगांव, जिला सतारा (वर्तमान महाराष्ट्र) में हुआ था।

Savitribai Phule ने किस समाज की स्थापना की थी?

महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर सत्यशोधक समाज (Satyashodhak Samaj) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसका उद्देश्य जातिगत भेदभाव समाप्त करना, सामाजिक समानता और शिक्षा को बढ़ावा देना था।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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