हैदराबाद। वासवी क्लब इंटरनेशनल (Vasavi Club International), सिकंदराबाद ने भूतपूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण हेतु तेलंगाना सरकार के सैनिक कल्याण विभाग को 25 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की। यह चेक वासवी क्लब इंटरनेशनल के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एरुकुल्ला रामकृष्ण द्वारा आज लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा (Governor Jishnu Dev Verma) को सौंपा गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने वासवी क्लब इंटरनेशनल के इस योगदान की सराहना करते हुए चेक को कैप्टन आर. श्रीनिवासुलु, निदेशक, सैनिक कल्याण, तेलंगाना को सौंपा। राज्यपाल ने कहा कि वासवी क्लब इंटरनेशनल की यह उदार पहल सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सामूहिक प्रयास हमारे भूतपूर्व सैनिकों के सम्मान के साथ-साथ समाज के समग्र कल्याण को भी सुदृढ़ करते हैं।
भूतपूर्व सैनिकों के लिए सरकारी योजना क्या है?
भारत सरकार भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाती है। इनमें वन रैंक वन पेंशन योजना, ईसीएचएस स्वास्थ्य योजना, पुनर्वास और रोजगार सहायता योजनाएं प्रमुख हैं। इसके अलावा शिक्षा छात्रवृत्ति, स्वरोजगार के लिए ऋण, कैंटीन सुविधा और आवास योजनाओं का लाभ भी दिया जाता है। इन योजनाओं का उद्देश्य सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है, ताकि सेवा के बाद भी उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
महाराष्ट्र में भूतपूर्व सैनिकों के क्या लाभ हैं?
महाराष्ट्र सरकार भूतपूर्व सैनिकों को कई विशेष लाभ प्रदान करती है। इसमें राज्य स्तर पर अतिरिक्त पेंशन सहायता, शिक्षा में आरक्षण, सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता और चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। शहीद सैनिकों के परिवारों को आर्थिक सहायता और अनुकंपा नियुक्ति भी दी जाती है। इसके अलावा राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से आवास, स्वरोजगार और पुनर्वास से जुड़ी योजनाएं लागू की जाती हैं, जिससे भूतपूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को सामाजिक और आर्थिक सहयोग मिल सके।
सैनिक कल्याण क्या है?
सैनिक कल्याण का अर्थ सशस्त्र बलों के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों तथा उनके परिवारों के हितों की देखभाल करना है। इसमें उनकी सामाजिक, आर्थिक और मानसिक जरूरतों का ध्यान रखा जाता है। सैनिक कल्याण योजनाओं के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेंशन और पुनर्वास जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि देश की सेवा करने वाले सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान, सुरक्षा और सहयोग प्राप्त हो तथा उन्हें सेवा के बाद भी सुरक्षित जीवन मिल सके।
भूतपूर्व सैनिकों की पेंशन कितनी बड़ी थी?
भूतपूर्व सैनिकों की पेंशन उनकी रैंक, सेवा अवधि और वेतनमान पर निर्भर करती है। सामान्य रूप से न्यूनतम पेंशन जूनियर रैंक के सैनिकों के लिए कुछ हजार रुपये से शुरू होकर उच्च अधिकारियों के लिए काफी अधिक होती है। वन रैंक वन पेंशन लागू होने के बाद समान रैंक और सेवा अवधि वाले सैनिकों की पेंशन में समानता लाई गई। समय-समय पर महंगाई भत्ते और संशोधन के कारण पेंशन राशि बढ़ती रहती है, जिससे भूतपूर्व सैनिकों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
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