CHINA- चीन के खिलाफ बड़ा मोर्चा, भारत सहित 50 देशों को एकजुट कर रहा अमेरिका

By Anuj Kumar | Updated: February 5, 2026 • 1:01 PM

वाशिंगटन,। अमेरिका के नेतृत्व में वैश्विक अर्थव्यवस्था और भविष्य की तकनीक को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक रणनीतिक कदम उठाया गया है। चीन के वर्चस्व को चुनौती देते हुए अमेरिका ने करीब 50 देशों के एक शक्तिशाली ट्रेडिंग ब्लॉक (Tranding Block) का प्रस्ताव रखा है। इस वैश्विक गठबंधन का मुख्य उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के उत्पादन, प्रोसेसिंग (Processing) और कीमतों को स्थिर रखना है ताकि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला किसी एक देश के नियंत्रण में न रहे।

50 देशों का ट्रेडिंग ब्लॉक, निर्भरता खत्म करने की कवायद

4 फरवरी, 2026 को वाशिंगटन में आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल के दौरान इस बड़े रोडमैप (Roadmap) की घोषणा की गई, जिसे भविष्य की तकनीक पर नियंत्रण सुरक्षित करने की एक निर्णायक वैश्विक रणनीति माना जा रहा है।

फ्लोर प्राइस से होगी मित्र देशों के उत्पादकों की सुरक्षा

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को एक ऐसा मजबूत ढांचा तैयार करना होगा, जिसमें टैरिफ और न्यूनतम कीमतों (फ्लोर प्राइस) के माध्यम से घरेलू और मित्र देशों के उत्पादकों की रक्षा की जा सके। वेंस ने कहा कि अमेरिका रेयर अर्थ और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स के लिए बेसलाइन कीमतें तय करने पर विचार कर रहा है ताकि चीन जैसे देश कीमतों को कृत्रिम रूप से गिराकर प्रतिस्पर्धियों को बाजार से बाहर न कर सकें।

रेयर अर्थ और ईवी मेटल्स पर चीन के दबदबे को तोड़ने की रणनीति

इस पहल का मुख्य केंद्र लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसी उन धातुओं को चीन के प्रभाव से मुक्त करना है, जो स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), सेमीकंडक्टर और मिसाइल गाइडेंस सिस्टम के लिए अनिवार्य हैं। वर्तमान में चीन दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत रेयर अर्थ खनन और 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग पर नियंत्रण रखता है और अक्सर कूटनीतिक विवादों के दौरान इनके निर्यात को हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है।

रणनीतिक भंडार और 10 अरब डॉलर के निवेश की तैयारी

इस ब्लॉक के माध्यम से न्यूनतम कीमत तय करने की योजना है ताकि सदस्य देशों की नई खदानें आर्थिक रूप से घाटे का सौदा न बनें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 10 अरब डॉलर के सरकारी ऋण और निजी निवेश के साथ एक रणनीतिक भंडार बनाने की भी घोषणा की है, जो इस ब्लॉक की नींव का काम करेगा।

भारत की अहम भूमिका, चीन पर निर्भरता खत्म करने का मौका

भारत ने इस बैठक में अपनी सक्रिय और महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए आपूर्ति श्रृंखला को जोखिम से मुक्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने फोर्ज नामक नई पहल के प्रति भारत के समर्थन की पुष्टि की।

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भारत को मिलेगा तकनीक और फंड का लाभ

भारत के लिए यह गठबंधन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में लिथियम और कॉपर के बड़े भंडार मिल रहे हैं। इस ब्लॉक का हिस्सा होने से भारत को खनन और प्रोसेसिंग के लिए अत्याधुनिक अमेरिकी तकनीक और फंड प्राप्त हो सकेगा, जिससे चिप-मैन्युफैक्चरिंग और ईवी क्षेत्र में चीन पर निर्भरता समाप्त होगी।

जयशंकर ने सम्मेलन के इतर कनाडा, सिंगापुर, इटली और इजराइल समेत कई देशों के समकक्षों से द्विपक्षीय चर्चा भी की, जो इस ब्लॉक की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

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