भारतीय वायुसेना को अजेय बनाने का मेगा प्लान
लंदन: ब्रिटेन के प्रतिष्ठित थिंक टैंक ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज’ (IISS) ने दावा किया है कि भारत जल्द ही फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों का एक विशाल ऑर्डर दे सकता है। करीब 36 अरब डॉलर के इस संभावित सौदे को सैन्य इतिहास के सबसे बड़े डिफेंस डील के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल विमानों की तत्काल तैनाती और भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) का भविष्य में साथ आना भारतीय आकाश को अभेद्य बना देगा। यह कदम चीन और पाकिस्तान की बढ़ती हवाई चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए निर्णायक साबित होगा।
वायुसेना की जरूरत: गिरती स्क्वाड्रन क्षमता और क्षेत्रीय चुनौतियां
भारतीय वायुसेना को अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में यह संख्या गिरकर 29 पर आ गई है। दूसरी ओर, चीन ने 300 से अधिक J-20 स्टील्थ फाइटर तैनात कर दिए हैं और पाकिस्तान भी चीन से J-35 स्टील्थ विमान खरीदने की तैयारी में है। इस रणनीतिक असंतुलन को दूर करने के लिए भारत को जल्द से जल्द आधुनिक विमानों की जरूरत है। चूँकि भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही 36 राफेल विमानों का इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचा मौजूद है, इसलिए 114 नए राफेल (MRFA प्रोग्राम के तहत) खरीदना सबसे तार्किक और त्वरित विकल्प माना जा रहा है।
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स्वदेशी बनाम विदेशी: राफेल और AMCA एक-दूसरे के पूरक
थिंक टैंक के अनुसार, राफेल और AMCA अब एक-दूसरे के प्रतियोगी नहीं, बल्कि एक-दूसरे का साथ देने वाले विमान हैं। राफेल (4.5 पीढ़ी) अपनी मल्टीरोल क्षमता और खतरनाक ‘स्कैल्प’ मिसाइलों के साथ भारत की तत्काल परिचालन जरूरतों को पूरा करेगा। वहीं, AMCA प्रोजेक्ट भविष्य की ‘स्टील्थ’ युद्धकला की कमान संभालेगा। भारत के लिए चुनौती अपनी घरेलू औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने की है, क्योंकि ‘तेजस’ जैसे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी रही है। ऐसे में राफेल की तत्काल खरीद वायुसेना को वह समय देगी, जिसमें वह AMCA और तेजस मार्क-2 जैसे स्वदेशी प्रोजेक्ट्स को परिपक्व कर सके।
MRFA प्रोग्राम क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
MRFA (मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट) प्रोग्राम का लक्ष्य भारतीय वायुसेना के लिए 114 नए आधुनिक लड़ाकू विमान खरीदना है। यह भारत की गिरती स्क्वाड्रन संख्या को सुधारने और चीन-पाकिस्तान की दोहरी चुनौती से निपटने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राफेल विमान को अन्य लड़ाकू विमानों (जैसे Su-57 या तेजस) के मुकाबले प्राथमिकता क्यों मिल रही है?
राफेल अपनी युद्ध-सिद्ध क्षमताओं, आधुनिक एवियोनिक्स और घातक मिसाइल सिस्टम के लिए जाना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के पास पहले से ही राफेल का मेंटेनेंस और ट्रेनिंग इकोसिस्टम तैयार है, जिससे नए विमानों को सेना में शामिल करना आसान और किफायती होगा।
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