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USA- धरती के बेहद करीब से गुजरेगा एस्टेरॉयड 2026 JH2, वैज्ञानिक बोले- खतरे की कोई बात नहीं

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: May 15, 2026 • 12:20 PM
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न्यूयॉर्क। अगले सप्ताह 2026 JH2 नाम का एक एस्टेरॉयड (Asteroid) पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरने वाला है। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार यह खगोलीय पिंड (Celestial body) चंद्रमा की दूरी से भी काफी नजदीक से निकलेगा, लेकिन इससे धरती को किसी प्रकार का खतरा नहीं है। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह एस्टेरॉयड पृथ्वी से करीब 90,917 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। इतनी कम दूरी से किसी एस्टेरॉयड का गुजरना खगोलविदों के लिए दुर्लभ घटना माना जा रहा है।

हाल ही में हुई एस्टेरॉयड की खोज

इस एस्टेरॉयड की खोज अमेरिका के कैनसास और एरिजोना स्थित स्पेस ऑब्जरवेटरी के वैज्ञानिकों ने की है। इसे अपोलो क्लास एस्टेरॉयड (Apollo class asteroid) की श्रेणी में रखा गया है, यानी इसकी कक्षा पृथ्वी की कक्षा को पार करती है। अब तक वैज्ञानिक 24 बार इस एस्टेरॉयड को ट्रैक कर चुके हैं और इसके आकार, गति तथा दिशा का लगातार अध्ययन किया जा रहा है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक इसका आकार 50 से 100 फीट तक हो सकता है, जो किसी छोटे भवन के बराबर माना जा रहा है।

टकराने पर हो सकता था भारी नुकसान

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस आकार का कोई एस्टेरॉयड पृथ्वी से टकराए तो वह किसी बड़े शहर को भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। हालांकि 2026 JH2 के मामले में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि टकराव की संभावना पूरी तरह खत्म हो चुकी है। कंप्यूटर सिमुलेशन और वैज्ञानिक गणनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि अगले सौ वर्षों तक भी यह एस्टेरॉयड पृथ्वी के लिए खतरा नहीं बनेगा।

दुनियाभर की एजेंसियां रख रहीं नजर

NASA की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी समेत दुनिया की कई प्रमुख वेधशालाएं इस एस्टेरॉयड की लगातार निगरानी कर रही हैं।खगोलविद मार्क नॉरिस समेत कई विशेषज्ञों ने भी करीब 90 हजार किलोमीटर की दूरी को पूरी तरह सुरक्षित बताया है। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी के पास से हर साल कई छोटे एस्टेरॉयड गुजरते हैं, जिनमें से अधिकांश पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलकर खत्म हो जाते हैं।

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अंतरिक्ष निगरानी लगातार जारी

वैज्ञानिकों का कहना है कि बड़े एस्टेरॉयड की निगरानी लगातार की जाती है ताकि भविष्य में किसी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके। आधुनिक तकनीक और अंतरिक्ष निगरानी प्रणालियों की मदद से ऐसे पिंडों की दिशा और गति का सटीक आकलन किया जा रहा है।

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