वॉशिंगटन। नासा का ऐतिहासिक आर्टेमिस-2 मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। 10 दिनों की लंबी अंतरिक्ष यात्रा के बाद ओरियन कैप्सूल प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में सुरक्षित उतरा। इस मिशन के जरिए करीब 50 वर्षों में पहली बार चार अंतरिक्ष यात्री—रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन—चंद्रमा के करीब पहुंचे। उन्होंने कुल 11.16 लाख किलोमीटर की दूरी तय की और चंद्रमा के फार साइड (Far Side) से गुजरते हुए पृथ्वी से 4,06,771 किलोमीटर की अधिकतम दूरी का नया रिकॉर्ड बनाया।
खतरनाक वापसी, लेकिन सुरक्षित लैंडिंग
पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान कैप्सूल की गति करीब 39,000 किलोमीटर प्रति घंटा थी। घर्षण के कारण बाहरी तापमान 2760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इसके बावजूद मिशन पूरी तरह सफल रहा और स्प्लैशडाउन के बाद अमेरिकी नौसेना ने अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
मिशन की खासियत : विविधता और नया इतिहास
यह मिशन कई मायनों में खास रहा। पहली बार किसी चंद्र मिशन में एक महिला, एक अश्वेत व्यक्ति और एक गैर-अमेरिकी नागरिक ने चंद्रमा की कक्षा तक का सफर तय किया। इस उपलब्धि ने अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
आर्टेमिस-3 की राह हुई आसान
आर्टेमिस-2 की सफलता ने नासा के अगले मिशन आर्टेमिस-3 के लिए रास्ता साफ कर दिया है। इस मिशन का लक्ष्य 2028 तक चंद्रमा पर मानव लैंडिंग कराना है और आगे चलकर मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजने की तैयारी करना है।
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आर्टेमिस-2 क्यों था बेहद महत्वपूर्ण?
आर्टेमिस-2 नासा का पहला क्रूड टेस्ट फ्लाइट था, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री शामिल थे। यह मिशन 1 अप्रैल को फ्लोरिडा के केप कैनवरल से एसएलएस रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी की दो कक्षाओं में घूमने के बाद चंद्रमा के बेहद करीब पहुंचकर उसकी परिक्रमा की। चंद्रमा के दूर वाले हिस्से (फार साइड) के पास से गुजरते हुए वे पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी—4,06,771 किलोमीटर—तक पहुंचे, जो अपोलो-13 के पुराने रिकॉर्ड से ज्यादा है।
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