Bangladesh: बांग्लादेश में बैंकिंग संकट

By Dhanarekha | Updated: February 27, 2026 • 4:16 PM

‘डिफाल्टर’ कारोबारी को सेंट्रल बैंक की कमान, विपक्ष ने कहा- ‘भीड़तंत्र’

ढाका: बांग्लादेश(Bangladesh) सरकार ने गारमेंट कारोबारी मोस्ताकुर रहमान को ‘बांग्लादेश बैंक’ का नया गवर्नर नियुक्त किया है, जिसके बाद देश में राजनीतिक घमासान मच गया है। अब तक इस पद पर अनुभवी अर्थशास्त्री या बैंकर ही नियुक्त होते रहे हैं, लेकिन मोस्ताकुर एक सक्रिय व्यवसायी और राजनीतिक दल BNP से जुड़े रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मोस्ताकुर की कंपनी पर 86 करोड़ टका का बकाया कर्ज है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक कर्जदार कारोबारी को केंद्रीय बैंक का प्रमुख बनाना ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) का स्पष्ट मामला है, जो देश की बैंकिंग प्रणाली के लिए खतरनाक साबित हो सकता है

सफल अर्थशास्त्री अहसान हबीब की अचानक विदाई

विवाद की दूसरी बड़ी वजह पूर्व गवर्नर अहसान हबीब मंसूर को अचानक(Bangladesh) पद से हटाना है। IMF के पूर्व अधिकारी मंसूर ने शेख हसीना सरकार गिरने के बाद आर्थिक अस्थिरता के दौर में कमान संभाली थी। उनके 18 महीने के कार्यकाल में विदेशी मुद्रा भंडार 26 अरब डॉलर से बढ़कर 35 अरब डॉलर पहुंच गया था और महंगाई दर में भी गिरावट आई थी। मंसूर का कहना है कि उन्हें पद से हटाए जाने की कोई आधिकारिक सूचना तक नहीं दी गई, बल्कि उन्हें मीडिया के जरिए अपनी बर्खास्तगी का पता चला।

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अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव

विपक्षी दल ‘जमात-ए-इस्लामी’ और कई आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के फैसलों से देश की अर्थव्यवस्था(Bangladesh) बर्बाद हो सकती है। उनका तर्क है कि राजनीतिक निष्ठा के आधार पर की गई नियुक्तियां वित्तीय अनुशासन को खत्म कर देंगी। ढाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और बैंकिंग सेक्टर के दिग्गजों का मानना है कि अहसान हबीब जैसे अनुभवी व्यक्ति को हटाकर एक विवादित कारोबारी को लाना बैंकिंग सेक्टर में ‘लूट’ का रास्ता खोल सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश की साख को धक्का लगेगा।

मोस्ताकुर रहमान की नियुक्ति को ‘भीड़तंत्र’ क्यों कहा जा रहा है?

विपक्ष का आरोप है कि सरकार योग्य अर्थशास्त्रियों को दरकिनार कर अपनी राजनीतिक निष्ठा वाले लोगों और दबाव बनाने वाले गुटों (भीड़) के प्रभाव में फैसले ले रही है, जिससे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा खत्म हो रही है।

पूर्व गवर्नर अहसान हबीब मंसूर का कार्यकाल कैसा रहा?

मंसूर का कार्यकाल काफी सफल माना जाता है; उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार को 35 अरब डॉलर तक पहुँचाया, मुद्रा ‘टका’ को स्थिर किया और महंगाई दर को 10.49% से घटाकर 8.58% पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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