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Bangladesh: बांग्लादेश में बड़े बदलाव की आहट

Author Icon By Dhanarekha
Updated: December 24, 2025 • 4:14 PM
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क्या तारिक रहमान संभालेंगे सत्ता की कमान?

ढाका: बांग्लादेश(Bangladesh) की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आने वाला है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान करीब दो दशक के निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को ढाका लौट रहे हैं। उनकी इस वापसी को फरवरी में होने वाले चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि बीएनपी उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर सकती है। हालांकि, पार्टी अध्यक्ष खालिदा जिया अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी के भविष्य और नेतृत्व को लेकर अंतिम फैसला वही लेंगी

पार्टी के भीतर मतभेद और वंशवाद की चुनौती

भले ही तारिक रहमान की वापसी से बीएनपी कार्यकर्ताओं में उत्साह है, लेकिन पार्टी के भीतर ही उनके नाम पर विरोध के स्वर भी उठ रहे हैं। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं(Senior Leaders) का मानना है कि तारिक को पीएम चेहरा बनाने से विपक्षी दल उन पर ‘वंशवाद’ की राजनीति का आरोप लगा सकते हैं। खासकर बांग्लादेश(Bangladesh) के युवा मतदाता, जिन्होंने हालिया विद्रोह में बड़ी भूमिका निभाई है, वे विरासत की राजनीति को किस तरह स्वीकार करेंगे, यह पार्टी के लिए बड़ी चिंता का विषय है। बीएनपी के लिए चुनौती यह है कि वह 15 साल बाद सत्ता में वापसी के लिए अनुभव को चुने या किसी नए चेहरे को।

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जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन का गणित

शेख हसीना की अवामी लीग के कमजोर होने के बाद बांग्लादेश(Bangladesh) में जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। बीएनपी अब जमात के साथ गठबंधन करने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी स्तर पर जमात का मजबूत संगठन कई सीटों पर निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि, इस गठबंधन में कई जोखिम भी हैं। जमात के साथ हाथ मिलाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीएनपी की छवि प्रभावित हो सकती है और दोनों दलों के बीच वैचारिक मतभेद भविष्य में सरकार चलाने में मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।

तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी को वहां की राजनीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?

तारिक रहमान करीब 20 साल बाद देश लौट रहे हैं। उनकी वापसी ऐसे समय में हो रही है जब अवामी लीग हाशिए पर है और फरवरी में चुनाव होने वाले हैं। उन्हें पीएम उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है, जिससे बीएनपी को 15 साल बाद सत्ता में वापसी की उम्मीद दिख रही है।

बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के संभावित गठबंधन के सामने मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियां दोनों दलों के बीच गहरे ‘वैचारिक मतभेद’ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया है। जमात के साथ गठबंधन करने से बीएनपी(Bangladesh) की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे विदेशी संबंधों में तनाव आने का खतरा है।

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