Middile East War- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्रिटेन की एंट्री, रॉयल नेवी उतारेगी कमांडो

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
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लंदन । पश्चिम एशिया के होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा पर मंडराते खतरों के बीच ब्रिटेन ने बड़ा रक्षात्मक कदम उठाया है। रॉयल नेवी (Royal Neavy) ने अपनी विशेषज्ञ इकाई डाइविंग एंड थ्रेट एक्सप्लॉइटेशन ग्रुप को हाई अलर्ट पर रखा है। इस टीम का मुख्य उद्देश्य समुद्र में बिछाई गई संभावित बारूदी सुरंगों (Mince) का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना है।

खतरनाक मिशन में उतरेंगे विशेषज्ञ गोताखोर

इस ऑपरेशन (Operation) को दुनिया के सबसे जोखिम भरे सैन्य अभियानों में गिना जाता है। इसमें शामिल गोताखोरों को गहरे पानी, शून्य दृश्यता और विस्फोटकों के बीच काम करना पड़ता है। उनकी ट्रेनिंग बेहद उन्नत होती है, जिससे वे अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी सटीक कार्रवाई कर सकें।

मिनी-सबमरीन और एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, कमांडो नाव, पैराशूट या मिनी-सबमरीन (Mini Sabmrine) के जरिए लक्ष्य क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। ये मिनी-सबमरीन लगभग 50 किलोमीटर तक ऑपरेट करने में सक्षम हैं और अत्याधुनिक एस्ट्यूट क्लास पनडुब्बियों के साथ मिलकर काम करती हैं। इन कमांडो को बम निरोधक और काउंटर-टेरर ऑपरेशनों का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।

समुद्री माइंस से वैश्विक व्यापार को खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री माइंस का खतरा वैश्विक व्यापार के लिए बेहद गंभीर माना जा रहा है। अनुमान है कि ईरान के पास हजारों समुद्री माइंस हैं, जो संपर्क, चुंबकीय खिंचाव या ध्वनि संकेतों के आधार पर विस्फोट कर सकती हैं। कुछ माइंस समुद्र तल पर होती हैं, जबकि कुछ सतह के नीचे तैरती रहती हैं और जहाजों को निशाना बना सकती हैं।

वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर की आशंका

होर्मुज का यह मार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। मौजूदा तनाव के चलते यहां सैकड़ों मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। अगर यह मार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक तेल संकट और गहरा सकता है।

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हर स्थिति से निपटने की तैयारी

रॉयल नेवी के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल ईरान द्वारा माइंस बिछाने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तैयारी की जा रही है। इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।

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Anuj Kumar

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Anuj Kumar

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