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Britain: ब्रिटेन-अमेरिका संबंधों में तनाव

Author Icon By Dhanarekha
Updated: February 20, 2026 • 3:48 PM
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ईरान हमला और चागोस आइलैंड्स का विवाद

लंदन: ब्रिटेन(Britain) ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका को ईरान पर संभावित सैन्य हमले के लिए अपने ठिकानों (डिएगो गार्सिया और RAF फेयरफोर्ड) का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा। इस फैसले ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को नाराज कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रम्प ने इसके जवाब में चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटिश समझौते से अपना समर्थन वापस ले लिया है। ब्रिटेन का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बिना ठोस आधार के सैन्य कार्रवाई में मदद करना उसे भी कानूनी रूप से जिम्मेदार बना सकता है

डिएगो गार्सिया की रणनीतिक अहमियत

हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित डिएगो गार्सिया अमेरिका(America) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 3,800 किलोमीटर दूर है, जहाँ से अमेरिका(Britain) B-2 और B-52 जैसे भारी बमवर्षक विमानों के जरिए लंबी दूरी के मिशन संचालित कर सकता है। यहाँ गहरा बंदरगाह और विशाल एयरफील्ड है, जो इसे पूरे मिडिल ईस्ट और एशिया में सैन्य शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बनाता है। ट्रम्प का मानना है कि इस ठिकाने पर पूर्ण नियंत्रण खोना अमेरिका के लिए एक बड़ी रणनीतिक गलती होगी।

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पुरानी दोस्ती में दरार की चार प्रमुख वजहें

दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ने के पीछे चार मुख्य कारण हैं। पहला, सैन्य नीति, जहाँ ब्रिटेन अब अंतरराष्ट्रीय कानून को प्राथमिकता दे रहा है। दूसरा, चागोस द्वीप विवाद, जहाँ ब्रिटेन(Britain) मॉरीशस के साथ समझौता करना चाहता है जबकि अमेरिका इसे कमजोरी मान रहा है। तीसरा, अंदरूनी राजनीति, जहाँ ट्रम्प की ‘सौदा करने वाली’ नीति ब्रिटेन के ‘कानून आधारित’ नजरिए से टकरा रही है। और चौथा, ग्रीनलैंड जैसे वैश्विक मुद्दे, जहाँ दोनों देशों की सोच में बड़ा अंतर देखा गया है।

ब्रिटेन ने अमेरिका को एयरबेस देने से मना क्यों किया?

इसके पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय(Britain) कानून और इराक युद्ध के कड़वे अनुभव हैं। ब्रिटेन का मानना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए कानूनी मंजूरी और अंतरराष्ट्रीय समर्थन अनिवार्य है। इसके अलावा, ब्रिटिश सरकार का मानना है कि बिना ठोस सबूतों के किसी देश पर हमले में मदद करना उन्हें भी भविष्य में कानूनी मुश्किलों में डाल सकता है।

चागोस द्वीप समूह और मॉरीशस का विवाद क्या है?

मॉरीशस 1968 में अपनी आजादी के समय से ही इन द्वीपों पर अपना हक मांग रहा है। 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने भी ब्रिटेन को इन द्वीपों का प्रशासन छोड़ने का आदेश दिया था। वर्तमान ब्रिटिश सरकार कानूनी विवादों से बचने के लिए इसे मॉरीशस को सौंपने का समझौता कर रही है, जिसका अमेरिका विरोध कर रहा है।

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