अल्बर्टा को अलग देश बनाने के लिए जनमत संग्रह की मांग
ओटावा: कनाडा(Canada) के पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा में अलगाववादी आंदोलन ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। बुधवार को आंदोलन के नेताओं ने दावा किया कि उन्होंने अलग देश की मांग पर जनमत संग्रह (Referendum) कराने के लिए 3 लाख हस्ताक्षर जुटा लिए हैं, जबकि इसके लिए कानूनी रूप से केवल 1.78 लाख हस्ताक्षरों की आवश्यकता थी। यदि चुनाव आयोग इन हस्ताक्षरों को वैध पाता है और कानूनी अड़चनें दूर होती हैं, तो 19 अक्टूबर 2026 को अल्बर्टा में स्वतंत्रता पर वोटिंग(Voting) कराई जा सकती है। हालांकि, वर्तमान सर्वे बताते हैं कि केवल 30% लोग ही अलग देश के पक्ष में हैं, जिससे इस प्रस्ताव का पास होना कठिन नजर आता है।
आर्थिक नाराजगी और ‘ओटावा’ से टकराव
अल्बर्टा के अलग होने की मांग के पीछे मुख्य कारण आर्थिक और राजनीतिक हैं। यह प्रांत तेल और गैस संसाधनों से समृद्ध है और कनाडा के कुल तेल उत्पादन का लगभग 84% हिस्सा यहीं से आता है। यहाँ के निवासियों की शिकायत है कि उनके द्वारा दिया गया भारी टैक्स ओटावा (केंद्र सरकार) में खर्च होता है, लेकिन बदले में उन्हें पर्याप्त लाभ या निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं मिलती। विशेषकर पर्यावरण और जलवायु संबंधी नियमों को लेकर प्रांत और केंद्र के बीच गहरा टकराव है, जिसे अल्बर्टा के लोग अपने ऊर्जा उद्योग के लिए हानिकारक मानते हैं।
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ट्रम्प सरकार की भूमिका और क्यूबेक का इतिहास
इस मामले में एक नया मोड़ अमेरिका की भूमिका को लेकर आया है। आरोप लग रहे हैं कि ट्रम्प प्रशासन के अधिकारी अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं को बढ़ावा दे रहे हैं। कुछ गुट तो अल्बर्टा को स्वतंत्र देश बनाने के बजाय अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की भी वकालत कर रहे हैं। कनाडा में अलगाववाद का इतिहास पुराना है; इससे पहले क्यूबेक प्रांत भी दो बार (1980 और 1995) अलग होने के लिए जनमत संग्रह कर चुका है। हालांकि, 2000 में आए ‘क्लेरिटी एक्ट’ और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने अब किसी भी प्रांत के लिए कनाडा से अलग होने की राह को कानूनी रूप से अत्यंत कठिन बना दिया है।
अल्बर्टा प्रांत कनाडा से अलग क्यों होना चाहता है?
इसके मुख्य कारणों में आर्थिक असंतोष (तेल संसाधनों से होने वाली कमाई पर केंद्र का नियंत्रण), ओटावा की केंद्र सरकार के साथ पर्यावरण नियमों पर मतभेद और अपनी अलग सांस्कृतिक व रूढ़िवादी राजनीतिक पहचान को बनाए रखने की इच्छा शामिल है।
क्या अल्बर्टा के लिए कनाडा से अलग होना आसान है?
नहीं, यह बहुत कठिन है। कनाडा के ‘क्लेरिटी एक्ट’ और 1998 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, कोई भी प्रांत अपने दम पर अलग नहीं हो सकता। इसके लिए एक स्पष्ट जनमत, स्पष्ट बहुमत और केंद्र सरकार के साथ लंबी संवैधानिक बातचीत की आवश्यकता होती है।
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